UAPA के तहत बिना ट्रायल दो साल की जेल ‘गैरकानूनी हिरासत’: सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, असम पुलिस को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को असम पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को बिना ट्रायल शुरू हुए दो साल तक जेल में रखना “गैरकानूनी हिरासत” है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता, चाहे उस पर UAPA जैसे कड़े कानून के तहत ही आरोप क्यों न हों। अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी असम में नकली भारतीय मुद्रा रखने के आरोप में गिरफ्तार टोनलोंग कोन्याक की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

पीठ ने कहा,
“UAPA में कठोर प्रावधान हो सकते हैं, लेकिन कानून गैरकानूनी हिरासत की अनुमति नहीं देता। यह बेहद चौंकाने वाला है। दो साल तक आपने चार्जशीट दाखिल नहीं की और व्यक्ति हिरासत में रहा? यह वास्तव में गैरकानूनी हिरासत है।”

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राज्य के वकील ने बताया कि कोन्याक म्यांमार का नागरिक है और उसके कब्जे से 3.25 लाख रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद हुई थी तथा वह कई मामलों में आरोपी है। वकील ने यह भी कहा कि अन्य सह-आरोपी फरार हैं, इसलिए चार्जशीट में देरी हुई।

इस पर न्यायमूर्ति मेहता ने पूछा कि जब कानून 43D के तहत अधिकतम 180 दिन की अवधि न्यायालय की अनुमति से बढ़ाई जा सकती है, तो चार्जशीट दाखिल करने में दो साल क्यों लगे।

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उन्होंने कहा,
“आप किसी व्यक्ति को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रख सकते। कानून के तहत तय अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं होती तो डिफॉल्ट बेल देनी ही होती है।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी को दो अन्य मामलों में भी चार्जशीट समय पर दाखिल न होने के चलते डिफॉल्ट बेल मिल चुकी है।

कोन्याक को जुलाई 2023 में गिरफ्तारी और प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लिया गया था, जबकि इस मामले की चार्जशीट 30 जुलाई 2025 को दाखिल हुई। पिछले वर्ष 20 दिसंबर को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उसने भारत में अवैध रूप से प्रवेश किया है और UAPA की धारा 43D(7) के तहत वह डिफॉल्ट बेल का हकदार नहीं है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो साल की जारी हिरासत “किसी भी तरह वैध नहीं मानी जा सकती” और आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया।

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यह फैसला एक बार फिर यह स्थापित करता है कि विशेष कानूनों की कठोरता के बावजूद जांच एजेंसियों को निर्धारित समयसीमा का पालन करना होगा तथा उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना किसी की स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता।

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