किसान संकट पर सुप्रीम कोर्ट समिति ने NABARD से की तीखी पूछताछ, FPO विफलताओं पर उठाए सवाल

किसानों की बदहाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने मंगलवार को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें समिति ने देशभर में बड़ी संख्या में विफल हुए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और NABARD की रणनीतियों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए।

यह बैठक पंचकूला स्थित समिति कार्यालय में हुई, जिसमें NABARD के अध्यक्ष शाजी केवी और समिति के सदस्य—पूर्व पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश नवाब सिंह (अध्यक्ष), कृषि नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा, हरियाणा के पूर्व डीजीपी बीएस संधू, अर्थशास्त्री डॉ. आरएस घुमन, और समिति सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल—ने भाग लिया।

यह समिति सितंबर 2024 में न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा गठित की गई थी, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण संकट को कम करने हेतु सुधारों की सिफारिश करना है। मंगलवार की बैठक में विशेष रूप से NABARD की भूमिका की समीक्षा की गई, जिसमें सतत कृषि, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

समिति ने NABARD द्वारा देशभर में 7,400 से अधिक FPOs को बढ़ावा देने और इनमें शामिल 27.5 लाख किसानों—जिनमें 82% छोटे और सीमांत किसान हैं—को लेकर उनके वास्तविक प्रभाव पर सवाल उठाए। समिति ने कहा कि जमीनी रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कई FPOs निष्क्रिय हो चुके हैं।

समिति ने पूछा, “विभिन्न चुनौतियों के बावजूद FPOs को बढ़ावा देने का परिणाम क्या रहा?” सदस्यों ने बड़े पैमाने पर FPO विफलताओं की ओर संकेत करते हुए कई हितधारकों के अभ्यावेदनों का हवाला दिया।

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NABARD ने FPO मॉडल को छोटे और सीमांत किसानों के लिए “व्यवहारिक समाधान” बताते हुए इसकी रक्षा की, हालांकि उसने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में सुधार की आवश्यकता को स्वीकार किया। उसने 2024-25 में स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज कार्यक्रम के तहत ₹1.96 लाख करोड़ वितरित करने और 17 करोड़ ग्रामीण परिवारों को सुलभ ऋण प्रदान करने की उपलब्धि को रेखांकित किया।

समिति ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, “जब ‘Ease of Doing Business’ को प्राथमिकता दी जा सकती है, तो ‘Ease of Doing Farming’ को समान स्तर पर क्यों नहीं रखा जा सकता?”

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NABARD अधिकारियों ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने की उनकी रणनीति वित्तीय समावेशन, मूल्य श्रृंखला विकास, अवसंरचना निवेश और ग्रामीण आजीविका के विविधीकरण पर आधारित है।

समिति ने कहा कि वह सभी संबंधित पक्षों से परामर्श लेकर किसानों की समस्याओं का समग्र समाधान तैयार कर रही है। मई में समिति ने केरल के कृषि मंत्री से राज्य की सब्जी और फल मूल्य समर्थन प्रणाली तथा किसान ऋण राहत आयोग मॉडल पर चर्चा की थी।

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समिति आने वाले हफ्तों में कृषि क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों से बातचीत जारी रखेगी और अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

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