राजमार्गों से अवैध कब्जा हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, निगरानी टीमों के गठन और ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप को प्रचारित करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते अवैध कब्जों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अवैध अतिक्रमण पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अधिकारियों की निगरानी टीमों का गठन कर नियमित गश्त की व्यवस्था की जाए।

जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह भी आदेश दिया कि केंद्र सरकार ‘राजमार्ग यात्रा’ मोबाइल एप्लिकेशन की जानकारी को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित करे। यह ऐप एनएचएआई द्वारा शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को जानकारी प्रदान करना और शिकायतों के निवारण को सरल बनाना है।

पीठ ने निर्देश दिया कि इस ऐप की उपलब्धता के बारे में जानकारी टोल प्लाजा और फूड प्लाजा पर प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए। साथ ही, संयुक्त सचिव को निर्देश दिया गया कि ऐप पर प्राप्त विभिन्न प्रकार की शिकायतों — विशेषकर अवैध कब्जों से संबंधित — और उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी अदालत में प्रस्तुत की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई को एक विशेष शिकायत निवारण पोर्टल बनाने का भी आदेश दिया है, जहां राजमार्गों पर अवैध कब्जों से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकें। इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट तीन महीने के भीतर दाखिल करनी होगी।

इसके अलावा, अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निरीक्षण के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करने का भी निर्देश दिया, जिसमें अवैध कब्जों से संबंधित डेटा एकत्र करने और निरीक्षण की प्रक्रिया शामिल होगी।

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“हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह राज्य पुलिस या अन्य बलों की निगरानी टीमों का गठन करे, जिनका काम नियमित और समयबद्ध गश्त करना होगा। इस संबंध में भी तीन महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए,” पीठ ने कहा।

यह निर्देश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्यान प्रकाश द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को लागू करने और अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग की थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता स्वाति घिल्डियाल को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया था और उनके द्वारा 5 अक्टूबर 2024 को प्रस्तुत सुझावों को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को उन्हें लागू करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।

इस मामले में अब अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी, जिसमें विभिन्न आदेशों के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

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