लीलावती अस्पताल रिश्वत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने HDFC बैंक के एमडी साशिधर जगदीशन को अंतरिम राहत देने से किया इनकार, बॉम्बे हाईकोर्ट जाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई के लीलावती अस्पताल से जुड़े एक कथित रिश्वत मामले में HDFC बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ साशिधर जगदीशन को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उन्हें सलाह दी कि वह अपनी कानूनी राहत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करें, जहां एफआईआर रद्द करने की उनकी याचिका 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने टिप्पणी की कि यद्यपि बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले में कई बार न्यायाधीशों ने खुद को सुनवाई से अलग किया, अब अंततः यह याचिका 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। “हमें सूचित किया गया है कि यह मामला 14 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट में सूचीबद्ध है। इस पृष्ठभूमि में हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं,” पीठ ने अपने आदेश में कहा।

पीठ ने यह भी कहा कि जगदीशन की याचिका इससे पहले 18, 25 और 26 जून को सूचीबद्ध थी, लेकिन न्यायिक अस्वीकृतियों के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। “हम आशा और विश्वास करते हैं कि हाईकोर्ट निर्धारित तिथि पर इस याचिका पर सुनवाई करेगा,” अदालत ने कहा।

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जगदीशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध किया और कहा कि यह एफआईआर “तथाहीन” है और एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी को परेशान करने के उद्देश्य से दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, “मेरा लीलावती ट्रस्ट के ट्रस्टियों के आंतरिक विवादों से कोई लेना-देना नहीं है। मकसद है बैंक के एमडी को थाने बुलाकर अफरातफरी मचाना।”

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस दलील से प्रभावित नहीं हुआ। पीठ ने जवाब दिया, “आप ये सभी तर्क हाईकोर्ट में रखें।”

रिश्वत के आरोप और एफआईआर

यह मामला 29 मई को मुंबई के बांद्रा पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से उत्पन्न हुआ, जो लीलावती किरतिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की शिकायत पर आधारित है। ट्रस्ट के अनुसार, जगदीशन ने मार्च 2022 से जून 2023 के बीच ₹2.05 करोड़ की रिश्वत ली ताकि पूर्व ट्रस्टी चेतन मेहता के नेतृत्व वाले गुट को आंतरिक मामलों में लाभ मिल सके।

एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 409 और 420 (विश्वासघात और धोखाधड़ी) लगाई गई हैं। ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि जगदीशन ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग कर ट्रस्ट के संचालन में हस्तक्षेप किया और एक गुट को बाकी पर हावी होने में मदद की। ट्रस्ट की ओर से मामले में सीबीआई जांच की भी सार्वजनिक रूप से मांग की गई है।

एक विवाद जिसे एक त्रासदी ने और बढ़ाया

यह विवाद ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी किशोर मेहता की अप्रैल 2024 में मृत्यु के बाद और अधिक तीव्र हो गया। उनके पुत्र प्रशांत मेहता ने आरोप लगाया कि HDFC बैंक द्वारा उनकी पारिवारिक कंपनी स्प्लेंडर जेम्स लिमिटेड (पूर्व में ब्यूटीफुल डायमंड्स लिमिटेड) के खिलाफ ऋण वसूली की कार्रवाई ने उनके पिता को प्रताड़ित किया और उसी के चलते उनकी मृत्यु हुई। कंपनी ने ₹14.74 करोड़ का डिफॉल्ट किया था और मई 2025 तक कुल देनदारी ₹65 करोड़ से अधिक हो गई थी।

जगदीशन का इनकार और प्रतिशोध का आरोप

जगदीशन ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में आरोपों से इनकार किया है और एफआईआर को “प्रेरित” और “प्रतिशोधात्मक” बताया है। उन्होंने कहा कि यह एफआईआर बैंक द्वारा वसूली कार्रवाई फिर से शुरू करने के तुरंत बाद दर्ज की गई और यह केवल “चयनित नकद लेन-देन की ज़ेरॉक्स प्रतियों” पर आधारित है, जिनकी कोई स्वतंत्र गवाह या पुष्टिकरण नहीं है। उन्होंने कथित रिश्वत की डायरी की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाया है।

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हाईकोर्ट में देरी और जजों की अस्वीकृति

बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई अब तक कम से कम पांच न्यायाधीशों की अस्वीकृति के कारण नहीं हो पाई। 30 जून को हाईकोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए इसे नियमित सूची में 14 जुलाई के लिए निर्धारित किया।

इस बीच, ट्रस्ट के ₹2.25 करोड़ की कथित हेराफेरी को लेकर चेतन मेहता और अन्य के खिलाफ एक दूसरी एफआईआर भी दर्ज की गई है।

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अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है, इस हाई-प्रोफाइल अस्पताल विवाद का भविष्य अब 14 जुलाई को होने वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करता है।

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