भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह निषेध अधिनियम को किसी भी व्यक्तिगत कानून पर सर्वोच्चता प्रदान करते हुए कहा कि बाल विवाह नाबालिगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिसमें स्वतंत्र रूप से जीवन साथी चुनने का उनका अधिकार भी शामिल है। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज
