भोपाल शूटिंग अकादमी आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट की शंका, मांगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की एक शूटिंग अकादमी में 17 वर्षीय प्रशिक्षु की कथित आत्महत्या पर सवाल उठाते हुए मध्य प्रदेश पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट और हलफ़नामा तलब किया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या यह वास्तव में आत्महत्या का मामला है या हत्या की संभावना को नज़रअंदाज़ किया गया है।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यह जांच का विषय है कि कोई व्यक्ति रायफल से अपनी छाती पर खुद गोली कैसे चला सकता है। पीठ ने कहा, “हमारी समझ के अनुसार, यह जांचना आवश्यक है कि क्या कोई व्यक्ति रायफल से अपनी छाती में गोली चला सकता है।” अदालत ने पीड़ित के पिता की उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा मुख्य आरोपी को दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती दी गई है।

दिसंबर 2024 में अकादमी में शॉटगन शूटिंग प्रशिक्षण ले रहे इस किशोर की मौत हो गई थी। पुलिस ने एक सीनियर छात्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था, जिसमें कथित तौर पर लड़के द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट आधार बना। जनवरी 2025 में आरोपी को अग्रिम ज़मानत मिल गई थी।

पीड़ित के पिता का कहना है कि हाईकोर्ट ने घटना की गंभीरता को नज़रअंदाज़ कर दिया और अप्रत्यक्ष रूप से उनके बेटे को ही दोषी ठहराया कि वह दबाव सहन नहीं कर सका। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी और अन्य वरिष्ठ छात्र उनके बेटे को रैगिंग और झूठे आरोपों से प्रताड़ित कर रहे थे। यहां तक कि उस पर ₹40,000 चोरी का झूठा इल्ज़ाम लगाया गया और अकादमी के वार्डन को भी इस अपमान और प्रताड़ना की जानकारी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हलफ़नामा दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसमें यह बताया जाए कि क्या जांच एजेंसी ने हत्या की संभावना सहित सभी पहलुओं की जांच की है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जांच के दौरान जब्त किए गए साक्ष्यों, की गई कार्रवाई और उपयोग की गई रायफल की लंबाई का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया जाए।

पीड़ित के पिता ने बताया कि उनका बेटा 1 दिसंबर 2024 को अपनी बहन और एक दोस्त से बात करते हुए बेहद परेशान था और कहा था कि उस पर लगाए गए झूठे आरोप उसके करियर और इज़्ज़त को बर्बाद करने के लिए हैं। बाद में सामने आए उसके व्हाट्सऐप चैट में भी उन लोगों के नाम मिले जिन्होंने कथित तौर पर उसे प्रताड़ित किया था।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि एफआईआर किशोर की मौत के लगभग एक महीने बाद दर्ज हुई, क्योंकि आरोपी प्रभावशाली और राजनीतिक संपर्क वाले हैं।

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सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को करेगा।

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