चुनावी बॉन्ड से प्राप्त चंदे के गैरकानूनी प्रयोग को रोकने का क्या तंत्र: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से प्रश्न किया है कि क्या उसके पास ऐसा कोई तंत्र है,जिससे चुनावी बॉन्ड से मिले चंदे का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में न हो सके। यदि कोई राजनीतिक पार्टी चंदे का प्रयोग हिंसक प्रदर्शन या अन्य गैरकानूनी मकसद के लिए करती है,तो उससे कैसे निपटा जा सकता है। फिलहाल कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली 2 सदस्यीय पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि,ऐसे राजनीतिक दल हैं,जिनका एजेंडा हिंसा है। क्या ऐसे दल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंडिंग नही करते होंगे। यदि राजनीतिक पार्टियां फंड एकत्र करें और इसका प्रयोग किसी प्रदर्शन में करें और प्रदर्शन हिंसक हो जाय। फंड के इस तरह के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार का नियंत्रण क्या है?

इसके जवाब में वेणुगोपाल ने कहा कि जनप्रतिनिधि कानून के तहत पंजीकृत दल,जिन्हें कम से कम 1 फीसदी मत मिला हो। वहीं दान के रूप में बॉन्ड को भुना सकती है। 15 दिनों में बॉन्ड पेपर में तब्दील हो जाता है। और राजनीतिक दल एसबीआई से बॉन्ड को भुना सकते हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर 100 करोड़ रुपयो का बॉन्ड खरीदा जाता है तो क्या गारंटी है कि इसका प्रयोग गैरकानूनी गतिविधियों में नही होगा। जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चुनावी बॉन्ड केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद चेक या डिमांड ड्राफ्ट से ही खरीदे जा सकते हैं। 

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