सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में अदानी समूह द्वारा प्रस्तावित थर्मल पावर प्लांट के खिलाफ कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि राज्य व केंद्र सरकार का पक्ष सुने बिना वह कोई निर्देश नहीं देगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने कहा,
“राज्य में पावर की कमी हो सकती है। हम इस तरह से आदेश पारित नहीं कर सकते। हमें पर्यावरणीय चिंताओं और विकास के बीच संतुलन साधना होगा।”
वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख, एक पर्यावरण कार्यकर्ता की ओर से पेश हुए और पीठ को बताया कि प्रस्तावित संयंत्र जंगलों से घिरा हुआ है और इससे स्लॉथ बियर (भालू) सहित अन्य वन्यजीवों को खतरा हो सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अदानी समूह ने उस समय पर्यावरणीय मंज़ूरी प्राप्त कर ली, जब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष लंबित था।
“वे वहां एक बहुत बड़ा पावर प्लांट बना रहे हैं जो पर्यावरण और वन्यजीवन को प्रभावित कर सकता है,” पारिख ने अदालत को बताया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कभी पावर प्लांट, कभी जंगल तो कभी नदियों को लेकर आपत्तियां उठाई जाती हैं, लेकिन विकास से जुड़े प्रोजेक्ट इस तरह से रोके नहीं जा सकते।
“मुद्दा ये है कि कभी पावर प्लांट को लेकर आपत्तियां आती हैं, कभी जंगलों को लेकर और कभी नदियों को लेकर। लेकिन विकास कार्यों को इस तरह से नहीं रोका जा सकता,” उन्होंने कहा।
पीठ ने यह भी पूछा कि क्या इस तरह की परियोजनाएं उचित सुरक्षा उपायों के साथ चलाई जा सकती हैं।
“हम आपके कहे पर संदेह नहीं कर रहे हैं। लेकिन क्या उचित शर्तों के साथ इसे अनुमति दी जा सकती है?” पीठ ने पूछा।
सीजेआई ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि केंद्र सरकार यह स्पष्ट करे कि वह इस परियोजना में पारिस्थितिकी और विकास के बीच संतुलन कैसे स्थापित करना चाहती है और इसके लिए क्या समाधान है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और अदानी समूह को भी जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है।
पीठ ने अभी अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं की है लेकिन कहा कि सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद ही मामले में कोई आदेश दिया जाएगा।

