संस्कृत में वकालत करने वाले देश के इकलौते वकील के बारे में जानिए

उत्तरप्रदेश—-संस्कृत भाषा मे वकालत करना बेहद मुश्किल और कठिन कार्य है,लेकिन वकालत केवल हिंदी और अंग्रेजी भाषा मे होती है। काशी नगरी बनारस में देश के इकलौते ऐसे अधिवक्ता है जो अपील से लेकर दलील तक सब कार्य संस्कृत में करते है। मूलरूप से बनारस के रहने वाले श्याम जी उपाध्याय जिनकी उम्र 74 वर्ष है,ये ऐसे अधिवक्ता है जो संस्कृत में हर कार्य करते है। 

श्याम जी उपाध्याय माथे पर काशी की पहचान का बड़ा सा तिलक और त्रिपुंड लगाते है। कोर्ट में न्यायाधीश के सामने बहस हो या किसी मसले पर तर्क वितर्क हो हर बात श्याम जी उपाध्याय पिछले 43 वर्षो से संस्कृत में करते आ रहे है। यही नही प्रातः 4 बजे उठने वाले श्याम जी उपाध्याय के कचहरी स्थित बस्ते की चौकी पर शिवलिंग विराजमान है।

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श्याम जी उपाध्याय अपने मुवक्किल के लिए कोई प्राथना पत्र भी लिखना हो या टाइप करना हो तो सब काम संस्कृत में करते है। ऐसा करने की प्रेरणा श्याम जी उपाध्याय को अपने पिता और संस्कृत में विद्वान स्व संकटा प्रसाद उपाध्याय से मिली है। मूलरूप से मिर्जापुर के रहने वाले श्याम जी उपाध्याय अब वाराणसी के शिवपुर में रहते है। 

श्यामजी उपाध्याय बताते है कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य और हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज से लॉ की पढ़ाई करने के बाद कचहरी आया और तब से आज तक संस्कृत में ही अपना सारा काम करता हूँ। साथी अधिवक्ता कमलेश त्रिपाठी हो या मुवक्किल शंकर मौर्या और शिवकुमार शर्मा सभी को श्याम जी उपाध्याय पर गर्व है। अधिवक्ता कमलेशपति त्रिपाठी कहते है कि जिस दिन से मैं कचहरी आया, उस दिन से इनको संस्कृत में ही कार्य करते देख रहा हूँ।

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