दिल्ली हाईकोर्ट ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग्स मामले से जुड़े विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई को जारी रखने की अनुमति दे दी है। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें आरोप पत्र को निरस्त कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए कहा, “यह याचिका स्वीकार की जाती है।” मामले में विस्तृत निर्णय अभी जारी होना बाकी है।
समीर वानखेड़े, 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी, 2021 में मुंबई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में तैनाती के दौरान कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग्स प्रकरण में चर्चा में आए थे। बाद में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के परिवार से उनके बेटे आर्यन खान को मामले में फंसाने की धमकी देकर 25 करोड़ रुपये की मांग की।
एनसीबी से प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की। आरोप था कि एजेंसी से हटाए जाने के बाद भी उन्होंने एनसीबी के विधिक प्रकोष्ठ से गोपनीय जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की और जांच को प्रभावित करने के लिए कानूनी अधिकारी से “आश्वासन” मांगा।
वानखेड़े ने विभागीय कार्रवाई को CAT में चुनौती दी थी, जहां अधिकरण ने 19 जनवरी को आरोप पत्र को रद्द कर दिया था। इससे पहले 12 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने विभागीय कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक हटाने से इनकार करते हुए CAT को मुख्य मामले का शीघ्र निपटारा करने को कहा था।
CAT के आदेश के बाद केंद्र सरकार हाईकोर्ट पहुंची। अब हाईकोर्ट ने अधिकरण के फैसले को पलटते हुए विभागीय कार्यवाही फिर से शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है।
अदालत के विस्तृत कारण आदेश की प्रति आने के बाद स्पष्ट होंगे।

