बॉम्बे हाईकोर्ट में सोमवार को पूर्व एनसीबी मुंबई जोनल निदेशक समीर वानखेड़े ने अपने खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले को चुनौती देते हुए स्पष्ट कहा कि उन्होंने अभिनेता शाहरुख खान से कभी कोई रिश्वत नहीं मांगी और न ही ली। यह मामला आर्यन खान की गिरफ्तारी से जुड़े चर्चित क्रूज़ ड्रग्स केस से संबंधित है।
मुख्य न्यायाधीश श्रीयुत चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ के समक्ष वानखेड़े की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने दलील दी कि सीबीआई के पास ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि वानखेड़े ने किसी भी प्रकार की रिश्वत की मांग की या उसे स्वीकार किया।
सीबीआई ने मई 2023 में वानखेड़े और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश (आईपीसी धारा 120-बी), उगाही की धमकी (धारा 388) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आर्यन खान को मामले से राहत दिलाने के बदले 25 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, वानखेड़े के वकील ने अदालत को बताया कि इन आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
यह मामला 2 अक्टूबर 2021 का है, जब एनसीबी को कॉर्डेलिया क्रूज़ पर ड्रग्स के इस्तेमाल की सूचना मिली थी। इसके बाद एजेंसी ने छापेमारी कर कई लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें आर्यन खान भी शामिल थे।
बाद में एनसीबी ने 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, लेकिन आर्यन खान को क्लीन चिट दे दी गई।
मामले ने उस समय नया मोड़ लिया था जब एक ‘स्वतंत्र गवाह’ ने आरोप लगाया कि एनसीबी से जुड़े कुछ अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों ने आर्यन खान को छोड़ने के बदले 25 करोड़ रुपये की मांग की थी।
इन आरोपों के बाद एनसीबी ने आंतरिक जांच शुरू की और उसकी रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी, जिसके आधार पर यह एफआईआर दर्ज की गई।
इसी एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी वानखेड़े के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।
मामले में प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई को मंगलवार तक के लिए जारी रखा है, जहां वानखेड़े की एफआईआर रद्द करने की याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।

