आरबीआई लोकपाल की शिकायतों पर दूसरे स्तर की मानवीय समीक्षा संबंधी आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपने ही एकल न्यायाधीश द्वारा पारित उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लोकपाल द्वारा खारिज की गई किसी भी शिकायत की trained कानूनी विशेषज्ञों द्वारा दूसरे स्तर की मानवीय समीक्षा की जानी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने आरबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को होगी।

दिल्ली हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने 27 नवंबर 2025 को पारित अपने फैसले में RBI की शिकायत निवारण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए कई निर्देश दिए थे। इनमें प्रमुख यह था कि:

“जब भी RBI लोकपाल के समक्ष दर्ज कोई शिकायत अंतिम रूप से खारिज की जाती है, तो उसे ऐसे कानूनी रूप से प्रशिक्षित व्यक्तियों (जैसे सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी, कम से कम 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले वकील आदि) द्वारा दूसरे स्तर की मानवीय समीक्षा से गुजरना चाहिए, ताकि छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण शिकायतें खारिज न हों।”

न्यायालय ने यह भी कहा था कि अगर लोकपाल की शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी और कुशल बनाया जाए, तो अदालतों और उपभोक्ता मंचों में लंबित मुकदमों की संख्या में काफी कमी लाई जा सकती है।

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो RBI की ओर से पेश हुए, ने कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा जारी किया गया निर्देश संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायालय की सीमाओं से परे जाता है।

उन्होंने यह तर्क दिया कि लोकपाल योजना बैंकिंग विनियमन अधिनियम और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत बनाई गई एक वैधानिक योजना है, और इसमें कोई भी संशोधन केवल उन्हीं प्राधिकारियों द्वारा किया जा सकता है जिन्हें उक्त कानूनों के तहत अधिकार प्राप्त हैं।

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सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने उस योजना को फिर से लिखवाने का निर्देश देकर RBI के विधायी क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है।

बेंच ने आरबीआई की दलीलों पर विचार करते हुए, एकल न्यायाधीश के पैरा 47(5) और 48 में दिए गए निर्देशों पर रोक लगा दी।

अदालत ने कहा:

“अतः, अगली सुनवाई की तारीख तक, impugned order के paragraphs 47(5) और 48 में निहित निर्देश स्थगित रहेंगे।”

इसके अतिरिक्त, डिवीजन बेंच ने RBI के डिप्टी गवर्नर को 15 जनवरी तक शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश पर भी रोक लगा दी।

यह मामला एक क्रेडिट कार्ड धारक की याचिका से शुरू हुआ था, जो एक धोखाधड़ी लेनदेन का शिकार हुआ था। याचिकाकर्ता की शिकायत RBI लोकपाल द्वारा तकनीकी आधार पर खारिज कर दी गई थी, और उसे कोई सुधार का अवसर नहीं दिया गया।

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एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा था कि:

“यदि कोई शिकायतकर्ता कोई त्रुटि करता है, तो उसे अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा था कि शिकायतों को मशीनी प्रक्रिया के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए, और RBI को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्राहक की सभी शिकायतों पर प्रभावी ढंग से विचार किया जाए।

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