पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष राम रहीम के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। साथ ही अदालत ने CBI की जांच प्रक्रिया और मुख्य गवाह की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शनिवार को यह फैसला सुनाया, जबकि 113 पृष्ठों का विस्तृत निर्णय सोमवार को सार्वजनिक हुआ। अदालत ने गुरमीत राम रहीम सिंह को आरोपों से मुक्त करते हुए कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त और भरोसेमंद साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में अन्य तीन आरोपियों की सजा को बरकरार रखा।
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में यह स्थापित सिद्धांत है कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों से दो संभावनाएँ निकलती हों—एक अपराध की और दूसरी निर्दोषता की—तो आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।
पीठ ने अपने निर्णय में कहा,
“इस न्यायालय की राय में अभियोजन पक्ष आरोपी संख्या-1 (गुरमीत राम रहीम सिंह) के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, जबकि आरोपी संख्या-2 से 4 के खिलाफ आरोप सिद्ध हुए।”
अदालत ने मामले के प्रमुख गवाह खट्टा सिंह की गवाही पर भी गंभीर टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि उनके बयान लगातार बदलते रहे और उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
निर्णय में कहा गया,
“खट्टा सिंह जैसे गवाह पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता। वह कई वर्षों तक चुप रहे और बाद में अपने बयान बार-बार बदलते रहे, जैसे पिंग-पोंग गेंद इधर-उधर उछलती रहती है।”
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि 26 दिसंबर 2006 को जब खट्टा सिंह ने पहली बार बयान दिया, तब उन्होंने इस मामले में गुरमीत राम रहीम का नाम नहीं लिया था और केवल रणजीत सिंह हत्या मामले का जिक्र किया था।
न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि गवाह वास्तव में धमकी के कारण चुप था, तो यह समझना कठिन है कि उसने रणजीत सिंह मामले में कथित साजिश का जिक्र कैसे किया, जबकि छत्रपति हत्या मामले में ऐसा नहीं किया।
पीठ ने यह भी संकेत दिया कि जांच एजेंसी पर जांच पूरी करने का दबाव हो सकता था और इसी कारण गवाह का बयान प्रभावित हुआ हो।
रामचंद्र छत्रपति सिरसा से प्रकाशित अखबार पूरा सच के संपादक थे। अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर उन्हें गोली मार दी गई थी। इससे कुछ समय पहले उनके अखबार में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित हुआ था, जिसमें डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में महिलाओं के कथित यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे।
गोली लगने के बाद छत्रपति गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई। इस मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह को साजिशकर्ता के रूप में आरोपी बनाया गया।
2006 में इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई थी। जनवरी 2019 में पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ राम रहीम ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।
मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2002 में डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी राम रहीम और चार अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने उस मामले में जांच को “दूषित और अधूरी” बताया था।
गुरमीत राम रहीम सिंह फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। वर्ष 2017 में उन्हें अपनी दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था और वह उसी मामले में 20 वर्ष की सजा काट रहे हैं।

