राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के बार-बार अपने वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहने पर कड़ी नाराज़गी जताई है और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शपथपत्र दाखिल कर इस लापरवाही का कारण बताने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति फरजंद अली की एकलपीठ ने कुलदीप सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि अभियोजन के गवाह—विशेषकर पुलिस अधिकारी जो बरामदगी की कार्यवाही में अहम भूमिका निभाते हैं—बार-बार अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट के कई प्रयासों और आदेशों के बावजूद अधिकारी पेश नहीं हो रहे।
अदालत को यह भी सूचित किया गया कि कुछ पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे, लेकिन उनका भी पालन नहीं हुआ। इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए न्यायमूर्ति अली ने टिप्पणी की कि “लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इससे अधिक शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता कि एक कार्यरत पुलिस अधिकारी, जो राज्य में कहीं तैनात है और सार्वजनिक दायित्व निभा रहा है, उसके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के बावजूद उसे गिरफ्तार न किया जा सके।”

पीठ ने कहा कि इस प्रकार का आचरण न्यायिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करता है और क़ानून के शासन पर समाज के भरोसे को हिलाता है। अदालत ने सवाल किया कि जब कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों पर है, तो वे न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कैसे कर सकते हैं।
इस संदर्भ में हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि वे 12 सितंबर तक अनुपालन शपथपत्र दाखिल कर बताएं कि उनके अधीनस्थ अधिकारी अपने वैधानिक दायित्वों में लगातार क्यों असफल हो रहे हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट अब तक क्यों निष्पादित नहीं किए गए।
इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।