रेप और जबरन गर्भपात के आरोपों का सामना कर रहे निष्कासित कांग्रेस विधायक राहुल मामकूटाथिल को केरल हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में 12 फरवरी को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें हाईकोर्ट ने यह कहते हुए विधायक को गिरफ्तारी से राहत दी थी कि इस मामले में उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं दिखाई देती।
पीड़िता द्वारा दाखिल याचिका में केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें पालक्काड से विधायक रहे राहुल मामकूटाथिल को अग्रिम जमानत दी गई थी। उनके खिलाफ बलात्कार और जबरन गर्भपात कराने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने पारित किया था। विधायक ने तिरुवनंतपुरम की सत्र अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि अभियोजन पक्ष यह दिखाने में विफल रहा कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि शिकायतकर्ता के आचरण से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि उसके और आरोपी विधायक के बीच सहमति से संबंध रहे हो सकते हैं, हालांकि इस मुद्दे का अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान ही होगा।
हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि यह विश्वास करना कठिन है कि शिकायतकर्ता, जो एक विवाहित और परिपक्व महिला है, विधायक को अपने अपार्टमेंट में बुलाए और बाद में पालक्काड जाकर उनके साथ ठहरे, यदि वह शारीरिक संबंध के लिए इच्छुक न हो।
अग्रिम जमानत देते समय अदालत ने विधायक पर कई शर्तें भी लगाईं। उन्हें शिकायतकर्ता या किसी भी अभियोजन गवाह से संपर्क करने से रोका गया है। साथ ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना केरल राज्य से बाहर न जाने और अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।
गौरतलब है कि इस मामले में राहुल मामकूटाथिल को 6 दिसंबर 2025 से गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला हुआ है। उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े तीन मामले दर्ज हैं। इनमें से दो मामलों में उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिल गई थी, जबकि तीसरे मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और नियमित जमानत मिलने से पहले उन्हें दो सप्ताह से अधिक समय तक हिरासत में रहना पड़ा था।

