इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए केंद्र सरकार को पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दे दी है। साथ ही, गृह मंत्रालय के अधिकारियों को संबंधित अभिलेखों के साथ अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.बी. पांडेय ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई खुले न्यायालय में न की जाए, क्योंकि गृह मंत्रालय से प्राप्त दस्तावेज अत्यंत गोपनीय प्रकृति के हैं। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई चैंबर में की।
सुनवाई के बाद अदालत ने गृह मंत्रालय के अवर सचिव विवेक मिश्रा और सहायक अनुभाग अधिकारी प्रणव राय को आवश्यक रिकॉर्ड के साथ उपस्थित होने के लिए कहा। अदालत ने दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद उन्हें वापस संबंधित अधिकारी को लौटा दिया।
अदालत ने याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर को केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा मामले को “पार्ट हर्ड” के रूप में सूचीबद्ध करने का अनुरोध खारिज कर दिया गया और स्पष्ट किया गया कि यह मामला अभी प्रारंभिक चरण यानी एडमिशन स्टेज में है।
मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
यह याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई है। उन्होंने लखनऊ स्थित विशेष सांसद-विधायक न्यायालय के 28 जनवरी के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की उनकी मांग खारिज कर दी गई थी।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने और मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

