पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने AAP विधायक मंजिंदर सिंह लालपुरा की सजा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई 28 अक्टूबर तक टाली

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मंजिंदर सिंह लालपुरा की उस याचिका पर सुनवाई 28 अक्टूबर तक के लिए टाल दी, जिसमें उन्होंने 12 साल पुराने एक महिला (अनुसूचित जाति समुदाय) से जुड़े छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में अपनी सजा को चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनीं लेकिन लालपुरा को कोई अंतरिम राहत नहीं दी। अदालत ने कहा कि इस मामले में आदेश अगली सुनवाई की तारीख पर पारित किया जाएगा।

ख़ादूर साहिब से विधायक लालपुरा को 10 सितंबर को तरण तारण की अदालत ने चार साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। सजा इस प्रकार दी गई थी:

  • SC/ST अधिनियम के तहत 4 साल की सजा
  • धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला/बल प्रयोग) के तहत 3 साल
  • धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत 1 साल
  • धारा 323 (मारपीट) के तहत 1 साल
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मुकदमे में कुल सात आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2013 को पीड़िता अपने परिवार के साथ गोइंदवाल रोड स्थित एक मैरिज पैलेस में एक समारोह में गई थी। इसी दौरान घटना हुई। उस समय लालपुरा टैक्सी चालक था। आरोप है कि लालपुरा और कुछ पुलिसकर्मियों सहित आरोपियों ने पीड़िता के साथ मारपीट की थी।

सुनवाई के दौरान लालपुरा के वकील ने दलील दी कि अगर हाईकोर्ट द्वारा सजा पर रोक नहीं लगाई गई तो विधायक की सदस्यता रद्द (डिसक्वालिफिकेशन) हो सकती है। इस स्थिति में उपचुनाव कराना पड़ेगा और यदि बाद में अपील में लालपुरा बरी हो जाते हैं तो इस स्थिति को पलटा नहीं जा सकेगा, जिससे अपरिवर्तनीय नुकसान होगा।

लालपुरा ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और मामला शिकायतकर्ता के रिश्तेदार के साथ संपत्ति विवाद से जुड़ा है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि SC/ST अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते, क्योंकि:

  • शिकायतकर्ता ने जाति प्रमाणपत्र साल 2018 में प्राप्त किया था।
  • इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि घटना के समय लालपुरा को शिकायतकर्ता की जाति की जानकारी थी।
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हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख तय की है। इसी दिन अदालत यह तय करेगी कि लालपुरा की सजा पर रोक लगाई जाए या नहीं। यह फैसला अहम होगा, क्योंकि इस पर ही पंजाब विधानसभा में उनकी सदस्यता टिकी हुई है।

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