पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ पर हमले के मामले में आरोपी पुलिस अधिकारी रॉनी सिंह को गिरफ्तारी से तीन दिन की अंतरिम राहत प्रदान की है। यह मामला 13 और 14 अप्रैल की रात पटियाला में हुई एक कथित मारपीट की घटना से जुड़ा है, जिसमें कुल 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप लगे हैं। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एच.एस. ब्रार ने रॉनी सिंह को ट्रायल कोर्ट से राहत प्राप्त करने के लिए समय देते हुए निर्देश दिया कि इस अवधि में उन्हें गिरफ्तार न किया जाए।
रॉनी सिंह ने 1 अप्रैल को हाईकोर्ट का रुख किया था और अपनी याचिका में दावा किया है कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। याचिका के अनुसार, पटियाला स्थित राजिंद्रा अस्पताल के पास एक वांछित मादक पदार्थ तस्कर को पकड़ने के लिए पुलिस द्वारा छापेमारी की गई थी। इसी दौरान, सिंह और उनकी टीम को कुछ लोगों का सामना करना पड़ा, जिनमें कर्नल बाथ और उनके बेटे भी शामिल थे। वे कथित रूप से सार्वजनिक स्थान पर शराब का सेवन कर रहे थे और अस्पताल के रास्ते को बाधित कर रहे थे।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब उन्हें हटने के लिए कहा गया तो कर्नल बाथ और उनके साथियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और सार्वजनिक शांति भंग की। सिंह ने यह भी कहा कि घटना की रिकॉर्डिंग सीसीटीवी में मौजूद है और कई चश्मदीद गवाह उनके पक्ष में हैं।

इसके अलावा, सिंह ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक भ्रामक सोशल मीडिया अभियान चलाया गया, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाईकोर्ट गुरुवार को कर्नल बाथ द्वारा दाखिल एक याचिका पर भी सुनवाई करने जा रही है, जिसमें उन्होंने घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। यह मामला न केवल कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उजागर करता है, बल्कि सोशल मीडिया के प्रभाव और पुलिस-पब्लिक टकरावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।