सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पोर्शे कार हादसे में दो आरोपियों की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पुणे पोर्शे कार दुर्घटना मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार से जवाब तलब किया है। इस हादसे में मई 2024 में दो आईटी प्रोफेशनल्स की मौत हो गई थी।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने आदित्य अविनाश सूद (52) और आशीष सतीश मित्तल (37) द्वारा दाखिल याचिकाओं पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। ये दोनों आरोपी उन दस लोगों में शामिल हैं, जिन्हें नाबालिग मुख्य आरोपी के रक्त सैंपल बदलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक 17 वर्षीय किशोर द्वारा कथित रूप से शराब के नशे में चलाई जा रही पोर्शे कार ने दो आईटी पेशेवरों—आनिश अवधिया और अश्विनी ढोले—को कुचल दिया था, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के कुछ ही घंटों में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने नाबालिग को बेहद सौम्य शर्तों पर जमानत दे दी थी, जिनमें सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना और काउंसलिंग शामिल थी। इससे देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई।

बाद में पुणे पुलिस ने बोर्ड के आदेश की समीक्षा की मांग की, जिसके बाद उसे संशोधित कर नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेजा गया। हालांकि, जून 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दिया।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शराब के सेवन के सबूत मिटाने के उद्देश्य से नाबालिग का रक्त सैंपल बदलने की साजिश रची गई थी। इसी कड़ी में सूद और मित्तल पर आरोप है कि उन्होंने अपने ब्लड सैंपल उपलब्ध कराए, जिन्हें नाबालिग और उसके साथ मौजूद दूसरे किशोर के सैंपल के रूप में पेश किया गया।

इस मामले में पुलिस ने कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें शामिल हैं:

  • नाबालिग के माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल
  • दो डॉक्टर — अजय टावरे और श्रीहरि हलनोर
  • ससून अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकंबले
  • दो बिचौलिये और
  • तीन अन्य — आदित्य सूद, आशीष मित्तल और अरुण कुमार सिंह
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16 दिसंबर 2024 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सूद, मित्तल समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। कोर्ट ने माना था कि इन पर सबूतों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप हैं और जांच प्रभावित हो सकती है।

अब इन आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जिस पर अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई नोटिस के जवाब के बाद होगी।

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