PIL में मांग- रविवार को मुख्यमंत्री को परेशान न करे अधिकारी; हाई कोर्ट ने लगाया 10 हजार का जुर्माना और एक साल का बैन

मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक जनहित याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमे ये मांग की गयी थी कि तमिलनाडु राज्य के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी रविवार को मुख्यमत्री के समक्ष किसी भी फाइल को न ले जाये और मुख्यमंत्री को परेशान न करे।

मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिल कुमार राममूर्ति की खंडपीठ ने 10,000 रुपये के भरी जुर्माने के साथ इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने अपना आदेश यह कहते हुए शुरू किया:

“यह पूरी तरह से हास्यास्पद याचिका है और किसी भी समझदार व्यक्ति को अदालत को परेशान करने से पहले कई बार सोचना चाहिए था।”

याचिका में प्रार्थना की गई थी कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर मुख्य सचिव और अन्य कर्मचारी रविवार को मुख्यमत्री के सामने कोई काम लेकर न जाये ।

पीठ ने कहा कि यह पूरी तरह से सरकार के मुखिया और अधिकारियों पर निर्भर करता है कि मुख्यमंत्री को कागजात कैसे पेश किए जाने चाहिए और मुख्यमंत्री कैसे कार्य करेंगे। अदालत ऐसी परिस्थितियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है, और यह आशा है कि भविष्य में ऐसी फर्जी याचिकाओं को अदालत में लाए जाने से पहले ही नष्ट कर दिया जाएगा।

ऐसे में कोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को कोविड-19 से निपटने के लिए उपयोग किए जाने वाले मुख्यमंत्री राहत कोष में 10,000/- रुपये (दस हजार रुपये मात्र) का भुगतान करना होगा।

याचिकाकर्ता को आदेश की तारीख से एक वर्ष के लिए कोई भी जनहित याचिका दायर करने से रोक दिया गया है, जब तक कि संबंधित बेंच द्वारा पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं किया जाता है।

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