सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका से जजों और वकीलों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश की मांग

धनबाद के जज उत्तम आनंद की मृत्यु के बाद, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें न्यायिक अधिकारियों, वकीलों और कानूनी बिरादरी से जुड़े लोगों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देशों की मांग कि गयी हैं। साथ ही सभी न्यायिक अधिकारियों को X श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने कि भी याचना कि गयी है।

याचिका में कहा गया है कि ऐसी घटनाएं न्याय प्रदान करने के लिए मौजूद कानूनी तंत्र के प्रति नागरिकों के विश्वास को हिला देती हैं। इसमें आगे कहा कि इस तरह की घटनाएं वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के लिए एक खतरे के रूप में न्याय में बाधा उत्पन्न करती हैं और न्याय की प्रक्रिया और कामकाज में बाधा डालती हैं।

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याचिकाकर्ता, एडवोकेट विशाल तिवारी ने भी इसी तरह की घटनाओं का हवाला दिया जैसे कि हैदराबाद स्थित वकील दंपति नागमणि और जी वामन राव की हत्या।

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याचिकाकर्ता के अनुसार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानूनी बिरादरी की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नीतियों और दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए इस स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

याचिका में आगे कहा गया है कि संस्थानों के लिए इस तरह का खतरा लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को महसूस किए बिना अराजकता का मार्ग प्रशस्त करता है, जिनका प्रचार किया जा सकता है।

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