सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के एक न्यायिक अधिकारी के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश में हस्तक्षेप करने से मन कर दिया है। भारी अस्पष्टीकृत बैंक लेनदेन के सम्बन्ध में एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी, जांच प्राधिकरण ने दिनांक 23.05.2016 की अपनी रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को अस्पष्टीकृत लेनदेन का दोषी पाया।
