शिक्षक भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) द्वारा ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) मोड के तहत संचालित 18 महीने के डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (D.El.Ed.) को वैध योग्यता माना जाएगा, लेकिन केवल उन्हीं शिक्षकों के लिए जो 10 अगस्त 2017 को सेवा में थे और जिन्होंने यह कोर्स 31 मार्च 2019 तक पूरा कर लिया था।
यह फैसला न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने Kousik Das एवं अन्य बनाम राज्य पश्चिम बंगाल एवं अन्य नामक मामले में सुनाया। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उन आदेशों को रद्द कर दिया जिसमें NIOS के 18 महीने वाले डिप्लोमा धारकों को सहायक शिक्षक की भर्ती से बाहर कर दिया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह विवाद 29 सितंबर 2022 को पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड (WBBPE) द्वारा जारी एक अधिसूचना से उत्पन्न हुआ, जिसमें सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की भर्ती की गई थी।

कुछ याचिकाकर्ताओं ने उन उम्मीदवारों की पात्रता को चुनौती दी, जिन्होंने NIOS से 18 महीने का D.El.Ed. किया था। उनका तर्क था कि केवल 2014 के NCTE रेगुलेशंस के तहत मान्यता प्राप्त दो वर्षीय D.El.Ed. ही वैध मानी जानी चाहिए।
29 फरवरी 2024 को कलकत्ता हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने याचिका (W.P.A. No. 16118 of 2023) स्वीकार करते हुए WBBPE को निर्देश दिया कि वे NIOS के 18 महीने वाले डिप्लोमा धारकों की भर्ती न करें। 24 जुलाई 2024 को डिवीजन बेंच ने इस फैसले को बरकरार रखा। इसके खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न:
- क्या NIOS द्वारा जारी 18 महीने का D.El.Ed. (ODL) कोर्स, NCTE के तहत निर्धारित 2 वर्षीय डिप्लोमा के समकक्ष है?
- क्या कलकत्ता हाईकोर्ट ने Jaiveer Singh बनाम उत्तराखंड राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या की?
- क्या 10 अगस्त 2017 तक सेवा में रहे शिक्षक, जिन्होंने 31 मार्च 2019 तक यह कोर्स पूरा किया, उन्हें RTE अधिनियम के तहत वैध प्रशिक्षित शिक्षक माना जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ:
कोर्ट ने साफ किया कि यह 18 महीने का कोर्स केवल सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक एकमुश्त छूट के तहत NCTE की 22 सितंबर 2017 की मान्यता पर आधारित था।
न्यायमूर्ति गवई ने कहा:
“पूरा कार्यक्रम केवल सेवा में रहे शिक्षकों को एक अवसर देने के लिए था… यदि वे 1 अप्रैल 2019 से पहले आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं करते, तो उन्हें सेवा से हटाया जा सकता था।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि Jaiveer Singh मामले में दी गई टिप्पणियों को हाईकोर्ट ने गलत तरीके से सभी 18 महीने वाले डिप्लोमा धारकों पर लागू कर दिया, जबकि वह फैसला विशेष परिस्थितियों में था।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर 2024 के Viswanath बनाम उत्तराखंड राज्य मामले का भी हवाला देते हुए दोहराया:
“10 अगस्त 2017 को सेवा में रहे और जिन्होंने 31 मार्च 2019 से पहले NIOS से 18 महीने का डिप्लोमा पूरा कर लिया, उन्हें वैध डिप्लोमा धारक माना जाएगा।”
कोर्ट का अंतिम निर्णय:
- सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली और कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया।
- NIOS का 18 महीने का D.El.Ed. डिप्लोमा वैध है, लेकिन केवल उन्हीं शिक्षकों के लिए जो 10 अगस्त 2017 को सेवा में थे और जिन्होंने 31 मार्च 2019 तक कोर्स पूरा किया।
- ऐसे उम्मीदवार भर्ती और पदोन्नति दोनों के लिए पात्र माने जाएंगे, बशर्ते वे अन्य पात्रता मानदंड पूरे करें।
- कोर्ट ने WBBPE और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि 3 महीने के भीतर पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करें।
कोर्ट का कथन:
“कोई भी शिक्षक जो 10 अगस्त 2017 को सेवा में था और जिसने 1 अप्रैल 2019 से पहले NIOS के माध्यम से 18 महीने का D.El.Ed. कोर्स पूरा किया है, वह वैध डिप्लोमा धारक है और 2 वर्षीय कोर्स पूरा करने वाले किसी भी शिक्षक के समान माना जाएगा।”
मामले का विवरण:
- मामले का शीर्षक: Kousik Das & Ors. बनाम राज्य पश्चिम बंगाल एवं अन्य
- मामला संख्या: Civil Appeal arising out of SLP(C) No. 19139 of 2024
- पीठ: न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह
पक्षकारों के अधिवक्ता:
- अपीलकर्ताओं की ओर से: श्री गोपाल संकरणारायणन (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्रीमती विभा दत्ता मखीजा (वरिष्ठ अधिवक्ता)
- प्रत्युत्तर पक्ष की ओर से: श्री जयदीप गुप्ता (वरिष्ठ अधिवक्ता)