एक महत्वपूर्ण सुनवाई में, राजस्थान हाईकोर्ट, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति फरजंद अली ने की, ने निकाहनामा (मुस्लिम विवाह प्रमाण पत्र) को केवल उर्दू में जारी करने से उत्पन्न चुनौतियों के बारे में गंभीर चिंताएँ व्यक्त कीं। यह देखते हुए कि उर्दू को सरकारी अधिकारियों, कानूनी कर्मियों और आम जनता द्वारा व्यापक रूप से नहीं समझा जाता
