एनजीटी का एचपीजीसीएल को निर्देश: फरीदाबाद में 152 एकड़ खाली जमीन पर विकसित करें ‘मियावाकी’ वन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि फरीदाबाद में फ्लाई ऐश (राख) निपटान स्थल से मुक्त कराई गई 152 एकड़ भूमि पर घने वृक्षारोपण की संभावना तलाशी जाए, जिसमें विशेष रूप से जापानी तकनीक ‘मियावाकी’ पद्धति का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल और अफरोज अहमद की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कोयला आधारित बिजली केंद्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश के प्रबंधन के बाद खाली हुई जमीन का उपयोग पर्यावरण सुधार के लिए किया जाना चाहिए।

यह मामला एचपीजीसीएल की इकाई, फरीदाबाद थर्मल पावर स्टेशन में फ्लाई ऐश के निपटान से संबंधित है। 25 मार्च के अपने आदेश में पीठ ने उल्लेख किया कि यहां राख निपटान के लिए दो साइटें (ऐश डाइक) थीं।

103 एकड़ में फैला पुराना डाइक पहले ही ठीक किया जा चुका है। वहीं, ‘नए डाइक’ से पूरी राख हटा ली गई है, जिससे अब 152 एकड़ जमीन खाली हो गई है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह क्षेत्र अब राख निपटान के लिए आवश्यक नहीं है, इसलिए इसे प्रकृति के संरक्षण में लगाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, “रिकॉर्ड बताते हैं कि नए ऐश डाइक के सुधार के बाद एचपीजीसीएल द्वारा 152 एकड़ क्षेत्र को वापस पा लिया गया है। यदि इस क्षेत्र का किसी अन्य उपयोग में प्रयोग नहीं किया जा रहा है, तो इसका उपयोग पर्यावरण की बेहतरी के लिए किया जाना चाहिए।”

ट्रिब्यूनल ने सुझाव दिया कि एचपीजीसीएल इस स्थान पर मियावाकी पद्धति अपनाने पर विचार करे। जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित इस तकनीक में स्वदेशी पेड़ों की विभिन्न प्रजातियों को बहुत पास-पास लगाया जाता है।

इस तकनीक की विशेषता यह है कि इससे जंगल सामान्य की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और पारंपरिक तरीकों के मुकाबले 30 गुना अधिक घने होते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने के लिए इसे एक अत्यंत प्रभावी उपकरण माना जाता है।

सुनवाई के दौरान एचपीजीसीएल की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने ट्रिब्यूनल को आश्वस्त किया कि निगम इस तरह के वृक्षारोपण की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करेगा।

READ ALSO  यदि नाबालिग प्रेमी के साथ स्वेच्छा से घर छोड़ती है तो अपहरण का कोई आरोप नहीं: हाईकोर्ट

एनजीटी ने इस निर्देश के साथ आवेदन का निपटारा कर दिया कि एचपीजीसीएल तीन महीने के भीतर रजिस्ट्रार जनरल को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट में जमीन के पर्यावरणीय उपयोग के संबंध में लिए गए निर्णय की जानकारी देनी होगी। ट्रिब्यूनल ने अंत में कहा, “यदि आवश्यक हुआ, तो मामले को विचार के लिए फिर से पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।”

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तेलंगाना हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों के स्थायित्व को मंजूरी दी
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles