NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा- “यह छात्रों के लिए मानसिक प्रताड़ना जैसा”, सरकार बोली- पीएम मोदी खुद रख रहे हैं नजर

नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को छात्रों और उनके परिवारों के लिए “गंभीर मानसिक प्रताड़ना” (Traumatic) करार दिया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक इस मामले में वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यह समस्या खत्म होने वाली नहीं है।

जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, “हमें अपने देश के युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए। असली समस्या तब तक खत्म नहीं होगी जब तक कि ठोस जवाबदेही तय नहीं की जाती।”

“परीक्षाओं से जुड़ी होती हैं पूरे परिवार की भावनाएं”

कोर्ट ने इस बात को गहराई से रेखांकित किया कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं सिर्फ एक शैक्षणिक पड़ाव नहीं हैं, बल्कि इनसे पूरे परिवार का सपना जुड़ा होता है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “अगर इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो यह न केवल छात्रों बल्कि उनके परिवारों के लिए भी बेहद दर्दनाक (traumatic) होती हैं। वे इसके लिए अपनी बहुत सारी भावनाएं निवेश करते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ढांचे में बड़े बदलाव करने या इसे हटाकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा के आयोजन के लिए एक अधिक मजबूत और पूरी तरह स्वायत्त संस्था बनाने की मांग की गई है।

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केंद्र सरकार का पक्ष: पीएम मोदी खुद कर रहे हैं निगरानी

अदालत की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन युवाओं की चिंताओं को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि व्यवस्था में कोई भी कमी (lacunae) न रहे।

इसके साथ ही सरकार ने बताया कि आगामी दोबारा परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए कुछ नए सुरक्षा तंत्र (mechanisms) लागू किए गए हैं।

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महत्वपूर्ण तारीखें और आगे का रास्ता

इस पेपर लीक ने हजारों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। इस मामले से जुड़े मुख्य घटनाक्रम और तारीखें इस प्रकार हैं:

  • 3 मई: देश भर में नीट-यूजी परीक्षा का आयोजन हुआ था।
  • 12 मई: पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद NTA ने परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया।
  • 21 जून (पुनः परीक्षा): रद्द की गई परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने की तारीख 21 जून तय की गई है।
  • CBI जांच: पेपर लीक के इन आरोपों की गहराई से जांच वर्तमान में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है।
  • जुलाई का दूसरा हफ्ता: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में अपना आधिकारिक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।
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पुराना संदर्भ: जब 2024 में उठा था यह मुद्दा

यह पहली बार नहीं है जब देश की यह प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा न्यायिक जांच के दायरे में आई है। इससे पहले साल 2024 में भी नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोप लगे थे। तब सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने से इनकार कर दिया था, लेकिन भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए थे और सरकारी परीक्षाओं को रद्द करने के पैमाने तय किए थे।

अब, जब शीर्ष अदालत “वास्तविक जवाबदेही” की मांग कर रही है और सीबीआई जांच जारी है, सरकार और NTA पर 21 जून को होने वाली परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में कराने का भारी दबाव है।

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