मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं के वकील द्वारा की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए मामला मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया है।
यह मामला क्रिमिनल अपील नंबर 14383/2024 (राजहंस बगाड़े एवं अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य) का था, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला कर रही थीं। न्यायालय में सुनवाई के दौरान वकील द्वारा न्यायपालिका के प्रति की गई टिप्पणी को उन्होंने अपने आदेश में दर्ज किया।
आदेश के अनुसार, वकील ने कहा:
“इस कोर्ट में 4 घंटे से तमाशा चल रहा है, मैं बैठा देख रहा हूँ। हाईकोर्ट जज दूसरी जगह जाकर कहते हैं कि नये जज का अपॉइंटमेंट करो लेकिन जजेस का हाल तो देखो, जो दिल्ली में हुआ वह भी देखा जाए। यहाँ पेंडेंसी बढ़ रही है और हमें harass किया जा रहा है। मैं आज शाम को जाकर मोहन यादव को बोलता हूँ। ये केस 20 बार लग चुका है, बड़ी मुश्किल से आज नम्बर आया। मैं अपने केस की बहस यहाँ नहीं करना चाहता, मेरे केस दूसरे बेंच में भेज दीजिए……….”
वकील ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन यादव से लगभग 20 बार संपर्क किया है और आग्रह किया है कि यह केस किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित कर दिया जाए, क्योंकि वह वर्तमान पीठ के समक्ष बहस नहीं करना चाहते।
न्यायालय ने वकील की उक्त टिप्पणियों को न्यायपालिका की अवमानना मानते हुए कहा कि इस प्रकार की भाषा अत्यंत अनुचित है और यह अदालत की प्रतिष्ठा के खिलाफ है।
न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला ने आदेश दिया कि इस आदेश की प्रमाणित प्रति माननीय मुख्य न्यायाधीश को “उनकी कृपा की दृष्टि एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु” सौंपी जाए।
फिलहाल, इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई है।
