25 मार्च 2021 की विविध ख़बरें

रेप के 3 आरोपियों को फांसी की सजा।

उत्तरप्रदेश—- बुलंदशहर में 2 वर्ष पूर्व जनवरी 2018 में टयूशन से अपने घर वापस लौट रही नाबालिग छात्रा को अगवा कर चलती कार में गैंगरेप करने के बाद हत्या करने के तीन दोषी युवको को पोस्को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। 

एडीजे,स्पेशल जज पोस्को अधिनियम राजेश पाराशर ने तीनों दरिदों सिकंदराबाद निवासी दिलशाद,इजराइल और जुल्फिकार पर 2.10-2.10 लाख रुपयों का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने मामले को अतिदुर्लभ मानते हुए कहा यदि अपराध के खिलाफ समाज की चीत्कार को अनसुना कर दिया,तो भय मुक्त समाज का निर्माण नही किया जा सकेगा। छात्रा के माता पिता ने इसे न्याय की जीत बताया है।

कोर्ट ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का हवाला देते हुए कहा कि अगर ऐसी घटनाओं के प्रति कठोर रुख नही अपनाया जाता है तो निश्चित रूप से ही न तो बेटी बचेगी और न ही पढ़ पाएगी। ऐसे अभियानों के कोई महत्व नही रह जायेगा।

अगले प्रधान न्यायाधीश होंगे जस्टिस एनवी रमना,सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मुहर।

नई दिल्ली—- भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने अपने उत्तराधिकारी एंव देश के 48 वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में जस्टिस एनवी रमना की सिफारिश की है। जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। जस्टिस एनवी रमना 24 अप्रैल को पदभार संभाल सकते हैं। 

सीजेआई बोबडे ने कानून मंत्रालय को लेटर भेजा है जिसमे जस्टिस रमना को 24 अप्रैल से भारत के 48 वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति की सिफारिश की है। 27 अगस्त 1957 को आंध्रप्रदेश में जन्मे जस्टिस रमना का कार्यकाल 26 अगस्त 2022 तक है। वह आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट के प्रथम जज होंगे,जो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनेगें।

बच्चों को गोद लेने की सहमति डीएम और एडीएम के हवाले।

नई दिल्ली—- बच्चों को अडॉप्ट (गोद) लेने से जुड़े मामलों का जिम्मा डीएम व एडीएम के हवाले करने के प्रावधान वाले किशोर न्याय संशोधन विधेयक को हरी झंडी मिल गई है। लोकसभा में सर्वसहमति से विधेयक पारित हो गया है। 

इससे बच्चों से जुड़े मामलों में जल्द निस्तारण के लिए कई प्रावधान हैं। कानून की निगरानी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी डीएम को सौंपी गई है। राज्यसभा इस बिल को बीते सप्ताह ही पारित कर चुकी है।

संशोधन बिल पर विचार विमर्श करते हुए महिला एंव विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि बच्चों की प्रत्येक स्तर पर सुरक्षा के लिए सुधार आवश्यक है। इस विधेयक के माध्यम से प्रशासनिक ढांचे को सुद्रढ़ और तार्किक बनाया गया है। आगे कहा कि वर्तमान हालत संतोषजनक नही है। देश के 29 प्रतिशत बाल गृहों का रजिस्ट्रेशन तक नही किया गया है। कई बाल गृहों से यौन उत्पीड़न की शिकायतें आई हैं। स्मृति ईरानी ने चर्चा करते हुए कहा कि बेहतर और सुसंगठन प्रशासनिक ढांचे के अभाव में देश मे गोद लेने की प्रक्रिया भी बेहद जटिल हो गई थी। गोद लेने की प्रक्रिया में निर्धारित वक्त से अत्यधिक समय जाया हो रहा था।इस बिल के कानूनी जामा पहनने के पश्चात गोद लेने की प्रक्रिया में होने वाली विलंब की समस्या से निजात मिलेगी। 

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