1 अप्रैल 2021 की विविध ख़बरें

हाई कोर्ट का आदेश ,कुंभ के दौरान प्रतिदिन 50 हजार कोविड टेस्ट कराए जाए।

उत्तराखंड—- हरिद्वार महाकुंभ 2021 की औपचारिक श्री गणेश की शुरुआत आज से हो चुकी है। एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलने वाले महाकुंभ में गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं को कोविड 19 की 72 घंटे पहले तक कि आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट लानी होगी। 

दूसरी ओर नैनीताल हाई कोर्ट ने हरिद्वार महाकुंभ क्षेत्र में रोजाना 50 हजार लोगों की कोरोना जांच कराने,वैक्सीनेशन कराने पार्किंग और घाटों के समीप मोबइल चिकित्सा वाहन तैनात करने का आदेश दिया है। 

कुम्भ मेला अधिकारी दीपक रावत के अनुसार मेला प्रशासन की तैयारियां पूरी हैं। हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं से कोरोना की मानक संचालन प्रक्रिया का पालन कराया जाएगा। कोविड निगेटिव रिपोर्ट के साथ मास्क लगाने की अनिवार्यता है। स्नान करने वाले घाटो पर सोशल डिस्टेंस के लिए गोले बनाए गए है। सैनिटाइजेशन के लिए बूथ और टीमें लगाई गई है। 

जिनके मकान शीशे के हों,वह दूसरों पर पत्थर नही मारते:– सुप्रीम कोर्ट।

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने किराएदार द्वारा मकान खाली करने पर आनाकानी करने पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि जिनके घर शीशे के हों,वे दूसरों पर पत्थर नही मारते। कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट हो गया है कि मकान मालिक ही असली मालिक होता है। किराएदार को स्वम को मालिक समझने की भूल नही करनी चाहिए। 

जस्टिस रोहिंग्टन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पिछले दिनों दिए आदेश में किराएदार दिनेश को किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार करते हुए कहा कि आपको परिसर खाली करना ही होगा। साथ ही पीठ ने बकाया किराया का भुगतान करने के लिए किरायेदार को और मोहलत देने से मना कर दिया। 

किरायेदार दिनेश के पक्षकार अधिवक्ता दुष्यंत पाराशर ने पीठ के समक्ष कहा कि उन्हें रकम जमा कराने के लिए कुछ दिनों का समय दिया जाय। लेकिन कोर्ट ने किराएदार को और वक्त देने से इनकार करते हुए कहा कि आप राहत पाने के हकदार नही है। आपको परिसर भी खाली करना ही होगा। 

लोक लुभावन वादों की रेवड़ियां बाटना बंद करें नेता:– हाई कोर्ट।

तमिलनाडु—- वोटरों को लुभाने के लिए लुभावनी घोषणाएं करने के प्रचलन पर मद्रास हाई कोर्ट ने बेहद नारजगी जाहिर करते हुए नेताओ को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि लोक लुभावन वादों की रेवड़ियां बांटना बंद करें। दूसरी ओर मतदाताओं से भी सवाल किया कि क्या अपने वोट बेचने वाले लोगों को नेताओं पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार है?

कोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की जिसमे तिरुनेवल्ली निवासी एम चंद्रमोहन ने निर्वाचन अधिकारियों को वसुदेवानल्लूर विधानसभा की आरक्षित सीट को सामान्य वर्ग में तब्दील करने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी। 

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जस्टिस एन किरबाकरान और जस्टिस बी पुगुलेंधि की खंडपीठ ने कहा हर दल लोकलुभावन वादों के मामले में एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करता है। अगर एक दल परिवार की महिला मुखिया को 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता का वादा करता है तो जवाब में दूसरा दल 1500 रुपये का प्रस्ताव रख देता है। परिणाम स्वरूप यह हुआ है कि लोगों में फ्री में जीवन यापन करने की मानसिकता पैदा होने लगी है। 

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