मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक ने दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा लगाए गए ₹10 लाख के जुर्माने को चुनौती दी है। यह जुर्माना फेसबुक मार्केटप्लेस पर कथित तौर पर बिना अनुमति वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग और बिक्री को लेकर लगाया गया था। मेटा का कहना है कि फेसबुक मार्केटप्लेस कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि केवल एक “नोटिस बोर्ड” जैसा मंच है।
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने मेटा से पूछा कि वह किस आधार पर कह रहा है कि CCPA का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि इस विवाद को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के समक्ष क्यों नहीं ले जाया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की गई है।
मेटा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि फेसबुक न तो अमेज़न या फ्लिपकार्ट की तरह ई-मार्केट है और न ही वह किसी लेन-देन की प्रक्रिया संचालित करता है। उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं से कोई शुल्क या कमीशन नहीं लेता।
उन्होंने अदालत में कहा, “हम कोई वर्चुअल खान मार्केट नहीं चला रहे हैं। यह सिर्फ फेसबुक उपयोगकर्ताओं के लिए एक नोटिस बोर्ड है। हम दुकान नहीं हैं, न ही कोई व्यापारिक लेन-देन कराते हैं और न ही किसी से कोई शुल्क लेते हैं।”
रोहतगी ने स्पष्ट किया कि फेसबुक मार्केटप्लेस केवल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का माध्यम है, जहां खरीदार और विक्रेता आपस में संपर्क करते हैं, लेकिन लेन-देन की प्रक्रिया प्लेटफॉर्म के जरिए नहीं होती।
CCPA ने 1 जनवरी 2026 के अपने आदेश में कहा था कि फेसबुक मार्केटप्लेस पर वॉकी-टॉकी जैसे उपकरणों की लिस्टिंग बिना आवश्यक खुलासों और वैधानिक अनुमति के की जा रही थी, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और आईटी नियमों का उल्लंघन है।
प्राधिकरण ने मेटा को निर्देश दिया था कि ऐसे सभी उत्पाद, जिनके लिए वैधानिक प्रमाणन जरूरी है, बिना पूर्ण अनुपालन के प्लेटफॉर्म पर न दिखें। साथ ही, कंपनी को समय-समय पर स्व-ऑडिट करने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए भी कहा गया।
मेटा ने अपनी याचिका में कहा है कि CCPA ने फेसबुक मार्केटप्लेस को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मानकर गलत आधार पर कार्रवाई की है। कंपनी के अनुसार, यह व्याख्या कानून की मूल भावना के विपरीत है।
याचिका में कहा गया है कि यदि CCPA की यह व्याख्या मान ली जाए, तो हर वह डिजिटल मंच जहां लोग सामान से जुड़े पोस्ट डालते हैं—चाहे वह ऑनलाइन समाचार वेबसाइट हो या सामुदायिक मंच—उन्हें भी ई-कॉमर्स नियमों के दायरे में लाया जा सकता है।
मेटा ने यह भी कहा कि इस तरह की व्यवस्था से आम लोग, जो निजी तौर पर अपने घरेलू सामान बेचते हैं, अनावश्यक नियामकीय बोझ के दायरे में आ जाएंगे, जो नियमों के उद्देश्य के विपरीत है।
कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि CCPA का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और आईटी इंटरमीडियरी नियमों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करता है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
यह कार्रवाई CCPA द्वारा विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी की अवैध लिस्टिंग के खिलाफ शुरू किए गए व्यापक अभियान का हिस्सा है। प्राधिकरण ने 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन लिस्टिंग की पहचान की थी और अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो, जियोमार्ट और मेटा सहित 13 प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए थे।
अब दिल्ली हाई कोर्ट को यह तय करना है कि फेसबुक मार्केटप्लेस को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म माना जा सकता है या नहीं, और क्या CCPA को इस मामले में कार्रवाई करने का अधिकार था।

