मद्रास हाईकोर्ट ने VFI की याचिका खारिज की; प्रो वॉलीबॉल लीग प्रमोटर को ₹4 करोड़ का मध्यस्थीय अवॉर्ड बरकरार, ₹2.5 लाख लागत लगाई

मद्रास हाईकोर्ट ने वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (VFI) की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने प्रो वॉलीबॉल लीग के पूर्व प्रमोटर बेसलाइन वेंचर्स के पक्ष में दिए गए ₹4 करोड़ के मध्यस्थीय अवॉर्ड को चुनौती दी थी। अदालत ने माना कि 2018 के समझौते को समाप्त करने का फेडरेशन का निर्णय अनुचित था और अवॉर्ड में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने 21 जनवरी 2020 के मध्यस्थीय अवॉर्ड को बरकरार रखते हुए कहा कि इसमें “ऐसी कोई विकृति या प्रत्यक्ष अवैधता नहीं है जिससे इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप किया जाए।” अदालत ने VFI पर ₹2.5 लाख की लागत भी लगाई, जो बेसलाइन वेंचर्स को देय होगी।

बेसलाइन वेंचर्स और VFI के बीच वर्ष 2018 में प्रो वॉलीबॉल लीग के संबंध में एक समझौता हुआ था। बाद में फेडरेशन द्वारा समझौता समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद बेसलाइन वेंचर्स ने लाभ के नुकसान के लिए मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू की।

मध्यस्थीय न्यायाधिकरण ने बेसलाइन वेंचर्स के दावे को स्वीकार करते हुए VFI को ₹4 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया।

VFI ने मध्यस्थीय अवॉर्ड को निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया और अवॉर्ड में हस्तक्षेप की मांग की।

हाईकोर्ट ने कहा कि मध्यस्थीय अवॉर्ड में हस्तक्षेप का दायरा सीमित है और केवल तभी संभव है जब अवॉर्ड में प्रत्यक्ष अवैधता या स्पष्ट विकृति हो। न्यायालय ने साक्ष्यों के पुनर्मूल्यांकन से इनकार करते हुए कहा कि न्यायाधिकरण के निष्कर्षों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।

अदालत ने यह भी माना कि 2018 के समझौते को समाप्त करना फेडरेशन द्वारा अनुचित था, इसलिए बेसलाइन वेंचर्स को लाभ के नुकसान का मुआवजा देने का निर्देश सही है।

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हाईकोर्ट ने VFI की याचिका खारिज करते हुए ₹4 करोड़ के मध्यस्थीय अवॉर्ड को बरकरार रखा और फेडरेशन पर ₹2.5 लाख की लागत लगाई।

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