मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को AIADMK महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी (EPS) को एक दीवानी मानहानि वाद में नोटिस जारी किया। यह वाद पार्टी के पूर्व सांसद केसी पलानीसामी ने दायर किया है, जिसमें उन्होंने पलानीस्वामी पर उनके खिलाफ झूठे, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण आरोप फैलाने का आरोप लगाते हुए ₹1 करोड़ का हर्जाना मांगा है।
न्यायमूर्ति पी. धनपाल ने इस मामले में AIADMK सुलूर यूनियन सचिव पी. कंदवेल को भी नोटिस जारी किया है, जो इस वाद में सह-प्रतिवादी हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी, 2026 की तारीख तय की है।
केसी पलानीसामी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि एडप्पडी पलानीस्वामी और पी. कंदवेल ने मिलीभगत कर उनके खिलाफ झूठी पुलिस शिकायत दर्ज करवाई थी, जब पलानीस्वामी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे।
यह शिकायत 24 जनवरी 2020 को सुलूर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी, जिसमें यह झूठा आरोप लगाया गया कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने पार्टी से इसलिए निष्कासित किया क्योंकि वह अपने निजी स्वार्थ के लिए AIADMK से जुड़ाव का दुरुपयोग कर रहे थे।
इस शिकायत के आधार पर पलानीसामी को गिरफ्तार कर 19 दिनों तक जेल में रखा गया, जिसके बाद उन्हें 11 फरवरी 2020 को जमानत मिली।
पलानीसामी ने अदालत को बताया कि 16 अगस्त 2024 को मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस FIR को रद्द कर दिया था। उन्होंने इसे एक राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जिसका मकसद उनकी छवि को धूमिल करना था।
पूर्व सांसद ने दलील दी है कि यह पूरा प्रकरण एडप्पडी पलानीस्वामी और कंदवेल की दुर्भावनापूर्ण साजिश का नतीजा था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची और उन्हें मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने अदालत से मांग की है कि प्रतिवादियों को उनके खिलाफ कोई और झूठे या मानहानिकारक बयान फैलाने से रोका जाए, और उन्हें ₹1 करोड़ का क्षतिपूर्ति हर्जाना दिलाया जाए।

