जानिए भारत के अगले सीजेआई जस्टिस रमन्ना के बारे में

भारत के वर्तमान सीजेआई एसए बोबडे ने अगले चीफ जस्टिस के लिए जस्टिस रमन्ना की सिफारिश की है। 24 अप्रैल 1956 को जन्मे बोबडे 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। प्रधान न्यायाधीश के पद पर जस्टिस रमना 26 अगस्त 2022 तक काबिज रहेंगे। मूलतः किसान परिवार में पैदा हुए जस्टिस रमना ने कानूनी ज्ञान लंबे अनुभाव एंव कठिन परिस्थितियों के बाद हासिल किया है। वह तकरीबन 38 वर्षों से कानून और न्याय के क्षेत्र में अलग अलग भूमिका निभाते रहे हैं।

किसान परिवार से ताल्लुक-

जस्टिस एनवी रमना का जन्म आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नवरम गांव में किसान के घर मे हुआ था। उन्होंने बैचलर ऑफ साइंस और बैचलर ऑफ लॉ की पढ़ाई पूरी की।जज बनने से पूर्व कानून की दुनिया मे उनका दाखिला 10 फरवरी 1983 में एक एडवोकेट के तौर पर हुआ। वह आंध्रा हाई कोर्ट के साथ,सेंट्रल और आंध्रप्रदेश एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस कर चुके हैं।

सिविल,क्रिमिनल,संवैधानिक,लेबर,सर्विस और इलेक्शन से जुड़े मामलों में उन्होंने प्रैक्टिस की है। जबकि क्रिमिनल,सर्विस और इंटर स्टेट रिवर लॉ में उनकी विशेषज्ञता रही है।वह कई सरकारी संगठनों में पैनल काउंसलर के के पद और कार्यरत रह चुके हैं। वह आंध्रप्रदेश में एडिशनल एडवोकेट जनरल भी रह चुके हैं।

बोबडे के बाद सबसे वरिष्ठ जज-

मौजूद सीजेआई एस ए बोबडे के बाद जस्टिस रमना सबसे वरिष्ठ जजों की श्रेणी में हैं। 27 जून 2000 को उनकी नियुक्ति आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट के स्थायी जज के तौर पर हुई थी। 10 मार्च 2013 से 20 मई 2013 के मध्य वो आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट के ऐक्टिंग चीफ जस्टिस रहे।

वह कानूनी महत्व के कई विषयों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भी भागीदार रह चुके हैं। 2 सितंबर 2013 को उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर नियुक्ति दी गई। करीब 6 माह बाद 17 फरवरी 2014 को उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर हुई। इस वक्त वह सीजेआई बोबडे के बाद सबसे सीनियर जज है।इसलिये उन्हें अगला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि-

जस्टिस एनवी रमना के परिवार में उनकी पत्नी एन शिवमाला, और दो बेटियां डॉ एनएस भुवना और एनएस तनुजा है। बीते 3 वर्षों पहले जो उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया था उसके मुताबिक उन पर 30 लाख रुपये की देनदारी थी।इसके अलावा रमना और उनके परिवार के पास नोएडा,हैदराबाद समेत आंध्रप्रदेश में कुछ प्लॉटों के साथ खेती की पुस्तैनी जमीन सहित कुछ और अलग से कृषि की जमीन थी।

कई अहम फ़ैसले दिए

जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट के निलंबन पर तत्काल समीक्षा करने का फैसला सुनाया था। वह उस ऐतिहासिक पीठ का हिस्सा रहे जिसने देश के मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट के दायरे में लाया। जस्टिस रमना नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के एक्जीक्यूटिव चैयरमैन भी हैं।

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जजों की जिंदगी गुलाबों की सेज नही-

पिछले वर्ष एक कार्यक्रम में शिरकत करने के दौरान जस्टिस रमना ने जजों के जीवन के लिए अहम बात कही थी। उन्होंने कहा था कि मैं अपने अनुभव से कह सकता हूँ जजों की जिंदगी गुलाब की सेज नही है। उन्होंने कहा लोग जो सोचते हैं। सच्चाई उसके उलट है। उन्होंने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि मौजूदा समय मे जज बनने के लिए दूसरे पेशे से कहीं ज्यादा त्याग की जरूरत पड़ती है। और देश के भविष्य के लिए ऐसा करना पड़ता है। क्योंकि यह मजबूत स्वतंत्र जजों पर निर्भर है।

लेखक-

आशीष शर्मा

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