इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित लंबित आवेदनों की सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को 20 फरवरी 2026 तक आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि इन आवेदनों का शीघ्र निस्तारण किया जा सके।
न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने यह आदेश वादकारियों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद पारित किया। सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने एक आवेदन दाखिल कर सभी वादों के लिए एक प्रतिनिधि की नियुक्ति की मांग की। कोर्ट ने कहा कि इस आवेदन पर अगली सुनवाई की तिथि को आदेश पारित किया जाएगा।
कोर्ट ने रेकॉर्ड की विशालता को ध्यान में रखते हुए टिप्पणी की कि, “रिकॉर्ड विशाल है। वाद के सभी पक्षकार लंबित आवेदनों में आपत्तियां दाखिल करें ताकि इन आवेदनों का शीघ्र निस्तारण किया जा सके।”
इस प्रकरण का केंद्र मथुरा स्थित मुग़ल शासक औरंगज़ेब के काल की शाही ईदगाह मस्जिद है, जिसे लेकर हिन्दू पक्ष का दावा है कि यह मंदिर तोड़कर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर बनाई गई थी। हिन्दू पक्ष की ओर से 18 वाद दाखिल किए गए हैं, जिनमें मस्जिद को हटाकर मूल मंदिर के पुनः निर्माण की मांग की गई है।
इससे पहले 1 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल उन आवेदनों को खारिज कर दिया था, जिनमें हिन्दू उपासकों द्वारा दाखिल वादों की पोषणीयता को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ये वाद 1991 का पूजा स्थलों का विशेष प्रावधान अधिनियम, सीमांकन अधिनियम (Limitation Act) और वक़्फ अधिनियम के तहत प्रतिबंधित नहीं हैं।
कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 20 फरवरी 2026 नियत की है। इस दिन प्रतिनिधित्व संबंधी आवेदन पर आदेश पारित किया जाएगा और सभी लंबित आवेदनों पर बहस की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, बशर्ते सभी पक्ष समय से अपनी आपत्तियां दाखिल करें।

