केईएएम 2025 स्कोर कैलकुलेशन में आखिरी समय में किए गए बदलाव को केरल हाईकोर्ट ने अवैध करार देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को डिवीजन बेंच ने बरकरार रखा

केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को उस एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार द्वारा केईएएम 2025 (केरल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और मेडिकल एंट्रेंस एग्जामिनेशन) प्रवेश परीक्षा के प्रॉस्पेक्टस में अंतिम समय में किए गए बदलाव को रद्द कर दिया गया था।

जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्ण एस की पीठ ने कहा कि उन्हें “एकल न्यायाधीश के निर्णय में दखल देने का कोई कारण नहीं दिखता” और इस टिप्पणी के साथ राज्य सरकार की 9 जुलाई के आदेश के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया।

मामला उस समय उठा जब सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के एक समूह ने याचिका दायर कर सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी, जिसमें 1 जुलाई को — रैंक लिस्ट जारी होने से महज एक घंटा पहले — अंतिम स्कोर कैलकुलेशन की विधि में बदलाव कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस अचानक हुए बदलाव से मेरिट रैंकिंग प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ा।

एकल न्यायाधीश जस्टिस डी. के. सिंह ने सरकार के इस कदम को “अवैध, मनमाना और अनुचित” करार देते हुए कहा था कि निर्णय लेने का समय संदेह पैदा करता है। उन्होंने आदेश दिया था कि रैंक लिस्ट को 19 फरवरी के प्रॉस्पेक्टस में निर्धारित मूल फॉर्मूले के अनुसार दोबारा जारी किया जाए।

गुरुवार को डिवीजन बेंच ने इस आदेश की पुष्टि करते हुए कहा, “हम एकल न्यायाधीश के आदेश की पुष्टि कर रहे हैं।” बेंच ने यह भी कहा कि विस्तृत निर्णय कुछ दिनों में उपलब्ध होगा।

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