केरल हाईकोर्ट की कोचीन देवस्वोम बोर्ड को फटकार; भक्तों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने का दिया कड़ा निर्देश

केरल हाईकोर्ट ने कोचीन देवस्वोम बोर्ड (CDB) के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए उसे अपने प्रबंधन के तहत आने वाले सभी 409 मंदिरों में भक्तों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद बोर्ड तीर्थयात्रियों की प्राथमिक जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने त्रिशूर के प्रसिद्ध कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर में सुविधाओं की कमी को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि बोर्ड का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह श्रद्धालुओं को स्वच्छ शौचालय, पीने का शुद्ध पानी और पार्किंग जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करे।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि बोर्ड लाखों श्रद्धालुओं की जरूरतों को पूरा करने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा:

“इस अदालत के बार-बार निर्देशों के बावजूद, ऐसा प्रतीत होता है कि बोर्ड तीर्थयात्रियों की प्राथमिक और बुनियादी जरूरतों को सबसे कम प्राथमिकता दे रहा है। हम बोर्ड के इस तरह के रवैये की कड़ी निंदा करते हैं।”

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कोर्ट ने कहा कि देवस्वोम बोर्ड का काम केवल प्रशासन संभालना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि मंदिरों के आसपास का वातावरण स्वच्छ और गरिमापूर्ण हो। इसमें पर्याप्त पार्किंग, पीने के पानी की पहुंच और मंदिरों के परिसर में स्वच्छता बनाए रखना शामिल है।

जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने बोर्ड के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है:

  1. विस्तृत मूल्यांकन: बोर्ड को तुरंत हर मंदिर में मौजूदा सुविधाओं का ऑडिट करना होगा, जिसमें शौचालयों की संख्या और सफाई के मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
  2. समावेशी शौचालय परिसर: कोर्ट ने आधुनिक शौचालय परिसर बनाने की योजना बनाने का निर्देश दिया है। इन परिसरों में पुरुषों, महिलाओं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
  3. मासिक स्वच्छता अभियान: मंदिरों और उनके परिसरों को साफ-सुथरा रखने के लिए महीने में कम से कम एक बार व्यापक सफाई अभियान चलाया जाना अनिवार्य है।
  4. त्योहारों के दौरान विशेष व्यवस्था: वार्षिक उत्सवों के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए कोर्ट ने अस्थायी व्यवस्था के तौर पर पर्याप्त ‘बायो-टॉयलेट’ लगाने का निर्देश दिया है।
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तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश

हाईकोर्ट ने देवस्वोम कमिश्नर को तीन महीने के भीतर एक व्यापक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में सभी 409 मंदिरों में उपलब्ध सुविधाओं और सामान्य एवं त्यौहारों के समय आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का पूरा विवरण देना होगा।

साथ ही, बोर्ड को तीन महीने की समय सीमा के भीतर ही सभी मंदिरों में शौचालय परिसरों और विश्राम गृहों के निर्माण की अंतिम योजना भी प्रस्तुत करनी होगी।

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यह पूरा मामला कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर में भक्तों को हो रही असुविधाओं के बाद सामने आया। भद्रकाली को समर्पित यह प्राचीन मंदिर केरल के सबसे महत्वपूर्ण धर्मस्थलों में से एक है, जहां स्वच्छ शौचालयों की भारी कमी भक्तों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई थी।

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