केरल हाईकोर्ट ने यूएपीए मामले में गिरफ्तार एक श्रीलंकाई नागरिक और चेन्नई में रह रहे शरणार्थी को जमानत दे दी है। अदालत ने पाया कि आरोपी चार वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और निकट भविष्य में ट्रायल शुरू होने की संभावना नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी व्यक्तियों को प्राप्त है।
न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति पी. वी. बालकृष्णन की खंडपीठ ने 33 वर्षीय सत्कुनम उर्फ सबेशन को राहत दी, जिस पर एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण के बाहरी सुरक्षा विंग से जुड़े होने का संदेह है।
अदालत ने रिकॉर्ड किया कि अपीलकर्ता अक्टूबर 2021 से हिरासत में है और चार वर्ष चार माह से अधिक समय जेल में बिता चुका है। एनआईए मामलों की विशेष अदालत, एर्नाकुलम की रिपोर्ट के अनुसार ट्रायल निकट भविष्य में शुरू होने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रायल जनवरी 2027 में शुरू हो सकता है और दिसंबर 2027 तक पूरा होगा।
विशेष अदालत ने बताया कि अभियोजन पक्ष 209 गवाहों से साक्ष्य प्रस्तुत करेगा और 446 दस्तावेजों पर निर्भर करेगा, जिसके कारण कार्यवाही लंबी चलेगी।
पीठ ने कहा:
“.. हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि यह ऐसा मामला है जिसमें अपीलकर्ता को मांगी गई राहत दी जा सकती है।”
केंद्र सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यूएपीए के प्रावधानों के कारण अदालत जमानत नहीं दे सकती। इस तर्क को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शीघ्र सुनवाई का अधिकार सभी व्यक्तियों को प्राप्त है।
अदालत ने कहा:
“अनुच्छेद 21 में प्रयुक्त ‘जीवन’ शब्द का अर्थ संकुचित नहीं किया जा सकता और यह केवल देश के प्रत्येक नागरिक तक सीमित नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति को भी उपलब्ध है जो देश का नागरिक न हो।”
हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता को ₹1 लाख के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों पर रिहा करने का निर्देश दिया, जो एनआईए मामलों की विशेष अदालत की संतुष्टि के अधीन होगा।
अन्य शर्तें इस प्रकार हैं:
- बिना विशेष अदालत की अनुमति के केरल राज्य से बाहर नहीं जाएगा
- पासपोर्ट जमा करेगा
- अपना पूरा और वर्तमान आवासीय पता एनआईए को देगा
- केवल एक मोबाइल नंबर का उपयोग करेगा, जो हमेशा चालू रहेगा और जिसकी जानकारी जांच अधिकारी को दी जाएगी
- प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार को संबंधित थाने में उपस्थित होगा
- साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा
एनआईए के अनुसार, आरोपी अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के बाद एलटीटीई को पुनर्जीवित करने की साजिश में शामिल था। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसने श्रीलंका के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के उद्देश्य से हथियार जुटाए, ड्रग्स और हथियारों के सौदे से धन जुटाया और उस धन को तमिलनाडु में संपत्तियों में निवेश किया।
विशेष अदालत ने अप्रैल 2024 में उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने लंबी न्यायिक हिरासत, ट्रायल में संभावित विलंब और अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के अधिकार को ध्यान में रखते हुए सख्त शर्तों के साथ जमानत प्रदान की और स्पष्ट किया कि यह संवैधानिक संरक्षण सभी व्यक्तियों को प्राप्त है, चाहे वे नागरिक हों या नहीं।

