मेरिट में 51वीं रैंक के बावजूद छोटी किडनी के कारण सेना भर्ती से बाहर, कर्नाटक हाईकोर्ट ने मेडिकल रिव्यू की याचिका खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने भारतीय सेना में भर्ती प्रक्रिया के दौरान मेडिकल जांच में अनयोग्य ठहराए गए 25 वर्षीय एक अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी है। लिखित परीक्षा की मेरिट सूची में 51वीं रैंक हासिल करने वाले इस अभ्यर्थी ने अपीलीय मेडिकल बोर्ड के फैसले के खिलाफ रिव्यू मेडिकल बोर्ड (आरएमबी) गठित करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपीलीय बोर्ड के निर्णय के बाद रिव्यू मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराना किसी अभ्यर्थी का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही, सैन्य सेवाओं में ड्यूटी की बेहद चुनौतीपूर्ण और कठोर परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अपने असाधारण विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।

जस्टिस सी. एम. पूनाचा की एकल पीठ ने 17 सितंबर को यह आदेश पारित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सैन्य कर्मियों को जिन विषम परिस्थितियों में अपने दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है, उन्हें ध्यान में रखते हुए इस मामले में अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है।

मेरिट सूची में चयन के बाद मेडिकल जांच में अयोग्य घोषित

याचिकाकर्ता मोनिश एन. आराध्या ने इस वर्ष की शुरुआत में भारतीय सेना में भर्ती के लिए आवेदन किया था। लिखित परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अखिल भारतीय मेरिट सूची में 51वां स्थान हासिल किया था। हालांकि, इसके बाद हुई मेडिकल जांच में स्पेशल मेडिकल बोर्ड (एसएमबी) ने उनकी बाईं किडनी अविकसित (छोटी) होने और अन्य चिकित्सीय कारणों के आधार पर उन्हें सेवा के लिए अनफिट घोषित कर दिया।

इसके खिलाफ आराध्या ने अपीलीय मेडिकल बोर्ड (एएमबी) के समक्ष अपील दायर की। एएमबी ने जुलाई में उनका दोबारा मेडिकल परीक्षण कराया, लेकिन परिणाम वही रहा। बोर्ड ने बाईं किडनी का आकार सामान्य से छोटा पाए जाने पर उन्हें फिर से अनफिट करार दिया। इसके बाद आराध्या ने 10 अगस्त को एक अभ्यावेदन देकर रिव्यू मेडिकल बोर्ड गठित करने का आग्रह किया, जिसे सैन्य अधिकारियों ने नामंजूर कर दिया। इस फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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निजी अस्पताल की रिपोर्ट और आधुनिक स्कैन जांच में अंतर

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता के. एस. पोन्नप्पा ने अदालत में निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों की कई मेडिकल रिपोर्ट पेश कीं। इनमें मणिपाल अस्पताल की एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट भी शामिल थी, जिसके अनुसार याचिकाकर्ता की बाईं किडनी का माप 7.7 सेमी से 8 सेमी के बीच दर्ज किया गया था। इस आधार पर उन्होंने दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग की।

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इसके विपरीत, केंद्र सरकार और सेना की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अरविंद कामथ ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने पीठ को बताया कि अपीलीय मेडिकल बोर्ड ने अभ्यर्थी की जांच के लिए अत्याधुनिक ‘ट्रिपल-फेज सीईसीटी स्कैन’ तकनीक का उपयोग किया था। कामथ ने दलील दी कि यह स्कैन सामान्य अल्ट्रासाउंड की तुलना में कहीं अधिक सटीक और विश्वसनीय परिणाम देता है। इस उन्नत जांच में याचिकाकर्ता की बाईं किडनी का वास्तविक आकार 7 सेमी पाया गया था।

सेना के कड़े मेडिकल नियमों को अदालत ने ठहराया सही

सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए निर्धारित ‘मैनुअल ऑफ मेडिकल स्टैंडर्ड्स’ के नियमों का उल्लेख करते हुए अदालत ने माना कि क्लिनिकल जांच में यदि किसी अभ्यर्थी की किडनी में कोई भी स्थायी संरचनात्मक या कार्यात्मक असामान्यता पाई जाती है, तो उसे सेवा के लिए अयोग्य माना जाता है। नियमों के तहत अल्ट्रासाउंड जांच में यदि किसी भी तरफ की किडनी सिकुड़ी हुई दिखाई देती है और उसका आकार 8 सेमी से कम है, तो उम्मीदवारी निरस्त करने का स्पष्ट प्रावधान है।

हाईकोर्ट ने माना कि एएमबी द्वारा कराई गई सीईसीटी स्कैन जांच सामान्य अल्ट्रासाउंड की तुलना में अधिक सटीक है। याचिका खारिज करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि स्वयं याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत सभी स्कैन रिपोर्टों में भी बाईं किडनी का आकार 8 सेमी या उससे कम ही दर्शाया गया है। ऐसा कोई भी दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि किडनी का आकार 8 सेमी से अधिक था। चूंकि सैन्य भर्ती नियमावली 8 सेमी से कम आकार होने पर उम्मीदवारी खारिज करने का स्पष्ट निर्देश देती है, इसलिए चयन निरस्त करने का निर्णय पूरी तरह नियमों के अनुरूप है।

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एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील करेंगे अभ्यर्थी

हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद याचिकाकर्ता के वकील के. एस. पोन्नप्पा ने कहा कि अभ्यर्थी एकल पीठ के इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे और इस आदेश को खंडपीठ के समक्ष अपील के जरिए चुनौती देंगे।

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