जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट 16 फरवरी से स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम और दो सह-आरोपियों — शिल्पी उर्फ संचितागुप्ता और शरद चंद्र — द्वारा 2018 के बलात्कार मामले में सजा के खिलाफ दायर अपीलों पर नियमित सुनवाई शुरू करेगा।
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान कोई स्थगन (adjournment) नहीं दिया जाएगा। अदालत के आदेश में कहा गया, “सुनवाई 16.02.2026 से प्रारंभ होगी और स्थगन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी मामलों की सुनवाई प्रतिदिन की जाएगी, या तो दिन के बोर्ड के अंत में या दोपहर 2 बजे से, जो भी पहले हो, जब तक सभी वकीलों की बहस पूरी नहीं हो जाती।
25 अप्रैल 2018 को एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण के मामले में आसाराम, शिल्पी और शरद चंद्र को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी। यह अपराध 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में हुआ था। मामले में दो अन्य अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था। सभी तीन दोषियों ने उसी वर्ष हाईकोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन सुनवाई लगातार स्थगित होती रही।
शिल्पी और शरद चंद्र को 2018 में जमानत मिल गई थी और उनकी सजा निलंबित कर दी गई थी। वहीं, आसाराम अक्टूबर 2025 तक जेल में थे। उन्हें 29 अक्टूबर 2025 को इलाज के लिए छह माह की अंतरिम चिकित्सा जमानत मिली थी।
इस मामले में तेजी लाने के लिए दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि राजस्थान हाईकोर्ट तीन महीने के भीतर अपीलों का निपटारा करे।
इससे पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने आसाराम के वकील की गैरहाजिरी पर नाराजगी जताई थी और नोटिस जारी किया था। सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर वकील ने आश्वासन दिया कि 16 फरवरी से वह बहस शुरू करेंगे।
यह मामला लंबे समय से देशव्यापी सुर्खियों में रहा है। हाईकोर्ट की यह सख्त समय-सारणी संकेत देती है कि अदालत अब अपीलों का अंतिम निपटारा सुनिश्चित करना चाहती है।

