झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को शक्तिपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर, रजरप्पा के पुनर्विकास कार्यों की निगरानी तेज कर दी है। हाईकोर्ट ने रामगढ़ के उपायुक्त (DC) को मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे के कार्यों पर एक औपचारिक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजित नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने रामगढ़ उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज को यह आदेश दिया। हाईकोर्ट अब 25 मार्च को अगली सुनवाई के दौरान इन सुविधाओं की प्रगति की समीक्षा करेगा।
यह मामला संजीव कुमार द्वारा दायर एक अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसमें सितंबर 2023 में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों को लागू करने की मांग की गई थी। उन निर्देशों का उद्देश्य दामोदर और भैरवी नदियों के संगम पर स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर परिसर का पूर्ण कायाकल्प करना था, जहाँ प्रतिदिन भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
इससे पहले मंगलवार को, हाईकोर्ट ने अपने पुराने आदेशों का पालन न होने पर राज्य के पर्यटन सचिव और रामगढ़ उपायुक्त को तलब किया था। न्यायिक हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य मंदिर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद, उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज ने अब तक हुए कार्यों का विवरण पीठ के समक्ष रखा। जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि:
- बुनियादी ढांचा: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आठ चेंजिंग रूम (कपड़े बदलने के कमरे) बनकर तैयार हो चुके हैं।
- प्रकाश व्यवस्था: मंदिर परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के लिहाज से स्ट्रीट लाइटें लगा दी गई हैं।
- स्वच्छता: परिसर को हमेशा साफ रखने के लिए निजी कंपनियों के साथ समझौता किया गया है।
प्रगति रिपोर्ट के बावजूद, हाईकोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तत्काल सुधार की आवश्यकता जताई। खंडपीठ ने उपायुक्त को मंदिर परिसर को अवैध बस्तियों और बाधाओं से मुक्त रखने के लिए कड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने का निर्देश दिया।
साथ ही, नदी तट पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हाईकोर्ट ने भैरवी नदी के पास “रेड जोन” बैरिकेडिंग बनाने का सुझाव दिया। यह बैरिकेडिंग श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकेगी और डूबने की घटनाओं पर अंकुश लगाएगी।
रजरप्पा मंदिर के लिए हाईकोर्ट के व्यापक दृष्टिकोण में सुरक्षा घेरे के साथ स्थायी स्नान घाटों का निर्माण शामिल है। पिछले आदेशों में निम्नलिखित सुविधाओं पर भी जोर दिया गया था:
- पर्याप्त शौचालय और पेयजल की व्यवस्था।
- आपात स्थिति के लिए चिकित्सा सुविधाएं।
- मंदिर की पवित्रता और सुगमता बनाए रखने के लिए सभी अतिक्रमणों को हटाना।
हाईकोर्ट अब 25 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में इन लक्ष्यों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करेगा।

