झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रांची कार्यालय पर हुए पुलिस छापे से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर रोक लगा दी और केंद्रीय गृह सचिव को आदेश दिया कि ED कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ, बीएसएफ या अन्य अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाए।
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी ने ईडी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “हाईकोर्ट आमतौर पर FIR के शुरुआती चरण में अंतरिम संरक्षण देने से बचती है, लेकिन ऐसे मामलों में अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।”
कोर्ट के अहम निर्देश
- ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर रोक।
- केंद्रीय गृह सचिव को मामले में पक्षकार बनाया जाए।
- केंद्रीय सुरक्षा बलों को ईडी कार्यालय और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाए।
- रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन को सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश। किसी भी चूक पर SSP व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
- मामले में शिकायतकर्ता संतोष कुमार को भी पक्षकार बनाने का निर्देश।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की है।
ईडी की ओर से अधिवक्ताओं ए.के. दास और सौरभ कुमार ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता संतोष कुमार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का पूर्व कर्मचारी है, जो ₹23 करोड़ के घोटाले में जांच के घेरे में है। एजेंसी ने उसके पास से ₹9 करोड़ की नकदी बरामद की है।
ईडी ने बताया कि संतोष कुमार 12 जनवरी को दोपहर 1:20 बजे स्वेच्छा से ईडी कार्यालय आया था, उसे न तो समन भेजा गया था और न ही बुलाया गया था। लेकिन उसी दिन उसने एयरपोर्ट थाना में शिकायत दर्ज कराई कि उसे ईडी कार्यालय में प्रताड़ित किया गया।
इसके बाद 15 जनवरी की सुबह 6 बजे पुलिस ने ईडी कार्यालय पर छापा मारा और वहां से सीसीटीवी फुटेज जब्त किया। ईडी ने इसे एजेंसी के कामकाज में “सीधी दखलअंदाजी” बताते हुए हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग की है।
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी गर्मी ला दी है। विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“ईडी के खिलाफ रांची पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने आज जो आदेश दिया है, वह हेमंत सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी और मंत्री मिथिलेश ठाकुर इस साजिश के पीछे हैं।
“ईडी पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगवाने वाला, स्क्रिप्ट तैयार करवाने वाला, हेमंत जी का खास सहयोगी और अन्य घोटालेबाज… अब कानून की गिरफ्त से नहीं बचेंगे।”
जेमएम के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि पुलिस अपना काम कर रही थी और मरांडी “राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों के बीच टकराव भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने मरांडी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।
सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस ने कहा कि पुलिस ने सिर्फ घटनास्थल की जांच की है और भाजपा इस मामले को जरूरत से ज़्यादा तूल दे रही है।
यह पहली बार नहीं है जब झारखंड सरकार और ईडी आमने-सामने आए हैं। जनवरी 2024 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिल्ली स्थित उनके आवास पर छापेमारी को लेकर ईडी के अधिकारियों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।
FIR में सोरेन ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई उन्हें और उनके समुदाय को “परेशान और बदनाम करने” के इरादे से की गई। बाद में ईडी ने इस FIR को “दुरुपयोग” बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की थी। यह मामला अभी भी विचाराधीन है।
हाईकोर्ट की प्राथमिक टिप्पणी और आदेशों से यह साफ है कि मामला अब संवैधानिक अधिकार क्षेत्र, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और राज्य पुलिस की शक्तियों के टकराव की ओर बढ़ रहा है। 9 फरवरी की सुनवाई इस टकराव के भविष्य की दिशा तय कर सकती है।

