झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झटका देते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर विशेष MP/MLA अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द करने से इनकार कर दिया। मामला मुख्यमंत्री के खिलाफ भूमि घोटाले से जुड़े एक मामले में ईडी के समन का पालन न करने को लेकर दर्ज किया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत सोरेन के खिलाफ एक शिकायत दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने ईडी द्वारा जारी किए गए कई समनों के बावजूद जांच में सहयोग नहीं किया। यह शिकायत पहले रांची के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में दायर की गई थी, जिसे बाद में विशेष एमपी/एमएलए अदालत में स्थानांतरित किया गया।
ईडी के अनुसार, उसके रांची स्थित सहायक निदेशक देवराज झा ने शिकायत में कहा कि मुख्यमंत्री को कुल 10 समन भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने केवल दो समनों पर ही हाज़िरी दी, बाकी को नजरअंदाज कर दिया गया।
एजेंसी का कहना है कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति और सहयोग के बिना जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है और आरोपों की सही तरीके से जांच के लिए उनका बयान आवश्यक है।
इस शिकायत के आधार पर विशेष एमपी/एमएलए न्यायाधीश सार्थक शर्मा ने मामले में संज्ञान लिया और मुख्यमंत्री सोरेन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया था। इसके खिलाफ सोरेन ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले में इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान स्थिति में विशेष अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट के इस फैसले से मुख्यमंत्री सोरेन को राहत नहीं मिली है और उनके खिलाफ विशेष अदालत में कार्यवाही जारी रहेगी। यह मामला राज्य में कथित भूमि घोटाले और उसमें राजनीतिक हस्तियों की संलिप्तता की जांच से जुड़ा है।

