तमिल अभिनेता विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म जन नायक की रिलीज़ को लेकर उठे विवाद में नया मोड़ आया है। मद्रास हाईकोर्ट ने अपने हालिया आदेश में कहा है कि फिल्म में विदेशी ताकतों द्वारा भारत में सांप्रदायिक तनाव फैलाने और सेना से जुड़े दृश्य एवं संवाद शामिल हैं, जो सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले गंभीर जांच की मांग करते हैं।
मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने मंगलवार को एकल न्यायाधीश द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंसर बोर्ड (CBFC) को फिल्म को तत्काल प्रमाणपत्र देने का निर्देश दिया गया था। विस्तृत आदेश बुधवार को जारी किया गया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि CBFC ने फिल्म को Revising Committee को भेजने का जो निर्णय लिया, वह कुछ गंभीर आशंकाओं पर आधारित था। “रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य और संवाद हैं, जिनमें विदेशी ताकतें भारत में बड़े पैमाने पर धार्मिक संघर्ष पैदा कर रही हैं, जो धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ सकते हैं। इसके अलावा फिल्म में सेना से जुड़े कई दृश्य हैं, लेकिन इन मुद्दों से निपटने के लिए कोई रक्षा विशेषज्ञ समिति में शामिल नहीं है,” कोर्ट ने कहा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ये मुद्दे वाकई में गंभीर हैं और स्क्रीनिंग से पहले उचित रूप से जांचे जाने चाहिए।
CBFC ने न्यायमूर्ति पी टी आशा के 9 जनवरी 2026 के आदेश के खिलाफ अपील की थी। खंडपीठ ने पाया कि एकल न्यायाधीश ने CBFC को जवाब दाखिल करने और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया।
कोर्ट ने कहा, “जब याचिकाकर्ता ने CBFC चेयरपर्सन के निर्णय को चुनौती नहीं दी, तब तक रिट याचिका बनती ही नहीं थी। इसलिए एकल न्यायाधीश द्वारा विषय के गुण-दोष में जाकर निर्णय देना अनुचित था।”
CBFC की अपील को मंजूर करते हुए कोर्ट ने निर्माता की याचिका को सीधे खारिज करने के बजाय उसे संशोधित करने का अवसर प्रदान किया है। कोर्ट ने कहा कि यदि M/s KVN Productions LLP द्वारा याचिका उपयुक्त रूप से संशोधित की जाती है, तो एकल न्यायाधीश CBFC को काउंटर दाखिल करने का अवसर देकर मामले का शीघ्र निपटारा कर सकते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब यह एकल न्यायाधीश पर निर्भर है कि वह CBFC द्वारा फिल्म को Revising Committee को भेजने के निर्णय को वैध मानते हैं या नहीं।

