बिना कानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कर की गई शादी गैरकानूनी: इलाहाबाद हाई कोर्ट

प्रयागराज—-इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कर इंटरकास्ट मैरिज करने वाले तीन कपल्स को राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि इस विवाह में लव जेहाद कानून (उत्तरप्रदेश धर्मान्तरण निषेध अध्यादेश 2020) का अनुपालन नही किया गया है। साथ ही पीठ ने कहा कि बगैर कानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कर की गई शादी को मान्यता नही दी जा सकती। कोर्ट ने सुरक्षा मुहैया कराने से भी मना कर दिया है। 

हाई कोर्ट के जस्टिस सिध्दार्थ की खंडपीठ ने देखा कि अध्यादेश जो कि अब अधिनियम बन गया है कि धारा 8 और 9 का अनुपालन नही किया गया था। इस मामले में धर्मांतरण से 60 दिन पूर्व जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के समक्ष एक घोषणा पत्र जमा करना था। जो कि जोड़े ने नही जमा किया था। 

मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली अस्मा ने हिंदू व्यक्ति से हिंदू रीति रिवाज से शादी की थी। अपनी शादी का ऑनलाइन पंजीकरण के लिए आवेदन भी किया। कोर्ट ने कहा अस्मा के हिंदू धर्म मे धर्मान्तरण का कोई साक्ष्य नही पेश किया गया। हिंदू धर्म मे परिवर्तन के बगैर याचिकाकर्ताओं का विवाह कानून के मुताबिक नही किया जा सकता। 

इसके अलावा हुनैना ने भी धर्म परिवर्तन का हिंदू लड़के से शादी की थी। जिसने इस्लाम धर्म कबूल किया था। इसके उपरांत निकाह कराया गया। इस मामले में एक काजी द्वारा 5 मार्च 2021 को युवक के इस्लाम धर्म कबूल करने का प्रमाणपत्र भी दिया गया था। हालांकि इस मामले में कोर्ट में फैसला सुनाया कि पुरुष का याचिकाकर्ता हुनैना के साथ विवाह अवैध है। उपरोक्त अध्यादेश के मद्देनजर काजी के प्रमाणपत्र का कोई मतलब नही है। 

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आर्य समाज मंदिर का प्रमाणपत्र काम नही आया—-  करीना नामक युवती हिदू लड़के से शाादी करने के लियेके हिन्दू धर्म अपनाया था। इसके बाद आर्य समाज मंदिर में शादी की। विवाह का आर्य समाज मंदिर प्रशासन द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र भी पेश किया गया। यह शादी 27 फरवरी 2021 को हुई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता करीना अब पूजा के धर्मांतरण को कानूनी नही ठहराया जा सकता है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नही दी जा सकती। करीना ने लव जेहाद कानून की धारा 8 का अनुपालन नही किया है। 

धारा 8 क्या है—-  कानून की धारा 8 में कहा गया है कि कोई शख्स अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है उसे कम से कम 60 दिन पूर्व संबंधित जिले के डीएम या अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट से अपनी इच्छा प्रकट करने के लिए एक तय फॉर्म में एक घोषणा भेजना होगा। तभी यह कानूनी माना जायेगा। 

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