अगर आप Whatsapp एडमिन है तो सतर्क हो जाइये

Allahabad High Court के माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ के समक्ष हाल ही में एक जमानत याचिका दायर की गई थी। 

याची को आईपीसी की धारा 384 और आईटी अधिनियम की धारा 66 डी के तहत गिरफ्तार किया गया था ।

क्या है मामला?

मामला यह है कि याची एक Whatsapp ग्रुप का एडमिन था। 

इस ग्रुप में किसी सदस्य ने किसी अन्य व्यक्ति के लिए लिखा कि वो एक गिरोह के सदस्य और बच्चा चुराते है।

इस पर उस व्यक्ति ने ग्रुप के एडमिन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। 

शिकायतकर्ता नें आरोप लगाया गया है कि मैसेज की वजह से उसकी की प्रतिष्ठा खराब हुई है। 

Whatsapp ग्रुप के एडमिन होने के नाते याची को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

क्या तर्क दिया गया था?

याची के वकील ने तर्क दिया कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह 30.07.2020 से जेल में बंद है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का तर्क और निर्णय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 और दाताराम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में उच्चतम न्यायालय कें टिप्पणियों के आलोक (दोषी साबित होने तक एक व्यक्ति निर्दाेष है), में याची को को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

Case Details:-

Title: Anshu Malan vs the State of UP

Case No.  CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. – 33001 of 2020

Date of Order:12.10.2020

Coram: Hon’ble Justice Siddharth

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