सिन्दूर पहनने से मना करना भी तलाक का आधार हो सकता है- गौहाटी High Court

गौहाटी High Court में एक समीक्षा याचिका दायर किया गयी थी और 17.09.2020 को माननीय न्यायधीश सौमित्र सैकिया ने इसमें अपना फैसला सुनाया।

रेणु दास बनाम श्री भास्कर दास के तथ्य इस प्रकार हैं

श्री भास्कर दास ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, डिब्रूगढ़ में तलाक का मुकदमा दायर किया। याचिकाकर्ता ने जो आधार लिया था, वह उसकी पत्नी सुश्री रेणु दास द्वारा क्रूरता और परितयाग का था। जिला अदालत ने मामले को खारिज कर दिया, और याचिकाकर्ता ने एक अपील दायर की।

मामले में तर्क –

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ’सिंदूर’ नहीं पहनना या सिंदूर ’पहनने से इंकार करना क्रूरता का कार्य नहीं कहा जा सकता है और विवाह को भंग करने के लिए एक वैध आधार नहीं है।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि दोनों पक्षों के परिवारों द्वारा एक समझौता किया गया था ताकि वे अपने मतभेदों को सुलझा सकें। समझौते के अनुसार, वे अलग-अलग आवास में रहेंगे, और किसी भी पार्टी के रिश्तेदारों को उनके पास जाने की अनुमति नहीं थी। न्यायालय ने कहा कि इससे श्री दास को अपनी वृद्ध माता के प्रति अपनी विधिक जिम्मेदारी पूरी करने में बाधा होगी।

अदालत ने पाया कि पत्नी ने पति और उसके परिवार के खिलाफ तीन आपराधिक कार्यवाही शुरू की थी। मामले में पति को बरी कर दिया गया था, और आसन्न प्राधिकारी ने देखा था कि पत्नी अपने पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ गैर जिम्मेदाराना और गलत आरोप लगाती है। रानी नरसिम्हा शास्त्री बनाम रानी सुनीला रानी, में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के संदर्भ में विवाह और तलाक के विघटन को न्यायालय ने उचित ठहराया।

न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौते का भी उल्लेख किया जहां यह कहा गया था कि श्री दास अपनी पत्नी को बनाए रखेंगे और दोनों पक्ष के रिश्तेदारों को उनके यहॉ जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की शर्तें क्रूरता की श्रेणी में आती है।

High Court ने यह भी देखा कि पत्नी ने कहा था कि उसने सिन्दूर पहनना बंद कर दिया है क्योंकि वह श्री दास को अपना पति नहीं मानती थी। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अगर यह ऐसा मामला होता, जहां पत्नी ने कभी सिंदूर नहीं पहना होता, तो यह एक अलग मामला होता लेकिन इस उदाहरण में, उसने अपने और पति के बीच संबंधों में खटास आने के बाद सिंदूर पहनना बंद कर दिया। इसस यह पता चलता है कि शादी को पूरी तरह से तोड़ दिया गया था और इस तरह तलाक को मंजूरी दे दी गई।

High Court का फैसला

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया था कि सिन्दूर ना पहनना तलाक के लिए एकमात्र आधार था, इसलिए हाईकोर्ट का निर्णय प्रथम दृष्टया गलता था। हाईकोर्ट ने देखा कि तलाक देने के दौरान, अदालत ने इस तथ्य को ध्यान में रखा कि पत्नी ने पति के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दायर किए थे और यह भी देखा था कि शादी पूरी तरह से टूट गई थी। हाईकोर्ट के निर्णय में सिन्दूर ना पहनने केवल एक मात्र तलाक का आधार नहीं था ।

High Court ने मामले में कोई योग्यता नहीं पाई और समीक्षा आवेदन को खारिज कर दिया।

Case Details:-

Title:- Renu Das vs Sri Bhaskar Das

Case No. :Review.Pet. 73/2020 

Date of Order: 17-09-2020

Quorum :  Hon’ble Mr. Justice Soumitra Saikia

Advocates : For the Petitioner : Mr. H. Baruah, Advocate. ; For the Respondent : Mr. N. Hasan, Advocate. 

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