कोर्ट का समय बर्बाद करने और नाबालिग लड़के पे फर्जी रेप का केस करने पर 30 हजार का जुर्माना

गुजरात हाई कोर्ट के सामने एक चौकाने वाला मामला सामने आया है ,

जिसमे नाबालिक लड़की ने अपने ही पति के खिलाफ केस दर्ज किया है। 

मुकदमे के सुनवाई के दौरान लड़की पक्ष के लोगों ने कहा है कि इस मामले को आपसी बातचीत से सुलझा लिया गया है।

और अदालत से प्राथिमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया है ।

क्या है मामला – 

गुजरात मे हाल मेंं ही दो नाबालिक लड़के लड़की  की शादी उनके माता पिता द्वारा करवाई गई 

शादी के कुछ समय बाद ही लड़की के घरवालों ने लड़के के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई 

जिसमे उन्होंने कहा है कि लड़की की शादी  लड़के से तब हुई जब उसकी उम्र महज 11 वर्ष की थी।

और आरोप लगाया है कि उनकी बेटी अपने पति के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने को मजबूर थी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद की जांच-

लड़की पक्ष द्वारा एफआईआर पंजीकृत किये जाने के बाद 

सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अभियोजन पक्ष का बयान कोर्ट के समक्ष दर्ज किया गया ।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के समक्ष बयान में यह स्वीकारा है कि 

उसने आरोपी से शादी की थी और शादी के बाद उसे जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाने को मजबूर नहीं किया गया था।

नाबालिक लड़के की गुहार-

नाबालिक लड़के पर एफआईआर दर्ज होने के बाद लड़के ने गुजरात हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया 

और अपने ऊपर पॉस्को एक्ट की  धारा 4 और 12 और IPC की धारा 376 के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार लगाई है।

कोर्ट का हस्तक्षेप- 

दोनों पक्षो के दलीलों के बाद कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वह अभियुक्त और आवेदक के खिलाफ कोई कार्यवाही न करें।

आवेदक पक्ष  ने कोर्ट में एक एफेडेविट जमा किया है जिसमे कहा गया है कि 

दोनों पक्ष की पार्टियां सौहार्दपूर्ण ढंग से समझौते को तैयार हैं और इसलिए अगर प्राथमिकी रद्द हो जाती है तो उन्हें इससे किसी तरह की आपत्ति नही।

दोनों पक्षों की काउंसलिंग के बाद एक बात सामने आई है, कि इस धर्म समुदाय में बाल विवाह का चलन बहुत सालों से  है 

 माँ बाप पर कोर्ट का जुर्माना– 

गुजरात हाई कोर्ट ने दोनों पक्ष के पारिवारिक जीवन को बनाए रखने के लिए और नवयुगल की भलाई को देखते हुए न्यायालय ने प्राथमिकी और अन्य कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।

कोर्ट ने यह पाया कि दोनों पक्षों ने मामले को आपस मे सुलझा लिया है 

इसलिए मामले को ज्यादा लम्बा खीचने का कोई औचित्य नही 

हालांकि कोर्ट ने लड़के और लड़की दोनों के माता पिता को जल्दबाजी में मामला दर्ज कर 

कोर्ट का समय और संसाधनों को बर्बाद करने का दोषी मानते हुए 

30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है जिसे दोनों पार्टियां मिलकर साझा करेंगी 

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