क्या अधिवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता GST कर देने के लिए बाध्य है?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या ट्रिब्यूनल आदि में प्रैक्टिस करने वाले कई अधिवक्ताओं को वस्तु एवं सेवा कर विभाग से केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के तहत जिम्मेदारी तय करते हुए नोटिस प्राप्त हुए हैं।

आइए हम इस मुद्दे पर कानूनी दृष्टिकोण स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास करते है

अधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता कौन है?

अधिवक्ता

अधिवक्ता अधिनियम 1961 इसे खंड 2 (1) (क) में निम्न प्रकार से परिभाषित करता हैः

अधिवक्ता से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी नामावली में दर्ज अधिवक्ता अभिप्रेत है

अधिसूचना संख्या 12/2017-केंद्रीय कर (दर) का पैरा 2 (बी) यह प्रदान करता है कि अधिवक्ता का अर्थ अधिवक्ता अधिनियम 1961 धारा 2 (1) (ए), के तहत परिभाषित किया गया है, वही होगा।

नामांकित अधिवक्ता का अर्थ है अधिवक्ता जिसका नाम राज्य बार काउंसिल द्वारा तैयार अधिवक्ताओं के रजिस्टर में सूचीबद्ध है।

विदेशी वकीलों को भारत में एक अधिवक्ता के रूप में नहीं माना जाता है, क्योंकि वे किसी भी राज्य बार काउंसिल में नामांकित नहीं होते है।

वरिष्ठ अधिवक्ता

अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 16 में यह प्रावधान है कि सर्वाेच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय क्षमता, बार में अनुभव और ज्ञान पर विचार करते हुए किसी अधिवक्ता को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित कर सकते हैं।

अधिसूचना संख्या 12/2017 – केंद्रीय कर (दर) के पैरा 2 (क)  में यह प्रतिपादित है कि वरिष्ठ अधिवक्ता शब्द का वही अर्थ है जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 के तहत दिया गया है।

क्या कानूनी सेवा एक कर योग्य आपूर्ति है?

आइए हम कानूनी सेवा का अर्थ समझते हैं।

कानूनी सेवा अधिनियम 1987 की धारा 2 (1) (ग) में कानूनी सेवा के इस प्रकार परिभाषित किया गया है

विधिक सेवा के अंतर्गत किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण या अधिकरण के समक्ष किसी मामले या अन्य विधिक कार्यवाही के संचालन में कोई सेवा करना और किसी विधिक विषय के संबंध में सलाह देना भी है।

कर के दृष्टिकोण से, अधिसूचना 12/2017 – केंद्रीय कर (दर) दिनांक 28 जून 2017 में कानूनी सेवा को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है

कानूनी सेवा का अर्थ है, किसी भी तरीके से कानून की किसी भी शाखा में सलाह, परामर्श या सहायता के संबंध में प्रदान की गई सेवा और जिसमें किसी भी अदालत, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष प्रतिनिधित्वात्मक सेवाएं शामिल हैं;

केंद्रीय वस्तु और सेवा कर अधिनियम 2017 की धारा 9 में केंद्र सरकार को किसी भी सेवा या वस्तु के सपलाई या दोनों को अधिसूचित करने का अधिकार है, जिस पर कर का भुगतान रिवर्स चार्ज बेसिस पर किया जाएगा।

आम तौर पर, कर का भुगतान करने का दायित्व माल या सेवा के आपूर्तिकर्ता पर होता है, लेकिन रिवर्स चार्ज सिस्टम के तहत, प्राप्तकर्ता को कर का भुगतान करने की देयता होती है।

नोटिफिकेशन संख्या 13/2017 दिनांक 28 जून 2017, के माध्यम से रिवर्स चार्ज तंत्र में अधिवक्ता सेवाएं भी शामिल हैं।

पूर्वाेक्त अधिसूचना की प्रविष्टि क्रमांक 2 निम्न प्रकार से है

वरिष्ठ अधिवक्ता या कानूनी सेवाओं के माध्यम से अधिवक्ताओं की फर्म सहित एक व्यक्तिगत वकील द्वारा आपूर्ति की गई सेवाएँ, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से।

क्या जीएसटी छूट अधिवक्ताओं के लिए उपलब्ध है?

अधिसूचना संख्या 12/2017 दिनांक 28.06.2017 की प्रविष्टि संख्या 45 में निम्नलिखित सेवाओं को छूट दी  गई है-

(ए) वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा गैर व्यवसायिक संस्था या व्यवसायिक इकाई को कानूनी सेवाओं के माध्यम से, जिसका पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में 20 लाख से अधिक का टर्नओवर न रहा हो।

(बी) अधिवक्ताओं की एक फर्म या एक अधिवक्ता (वरिष्ठ अधिवक्ता के अलावा) द्वारा किसी अधिवक्ता या अधिवक्ताओं की फर्म, जिसमें वे व्यवसायिक इकाई जिनका पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में 20 लाख से अधिक टर्नओवर रहा हो शामिल नहीं होंगे, को कानूनी सेवाएॅं प्रदान करना।

उपर्युक्त यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है किसी अधिवक्ता या वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा 20 लाख रुपये से कम के टर्नओवर वाले गैर व्यवसायिक इकाई या किसी अधिवक्ता या अधिवक्ताओं की फर्म को दी गयी विधिक सेवा पर कर जीएसटी कर देने के लिए अधिवक्ता या वरिष्ठ अधिवक्ता बाध्य नहीं है।

क्या वरिष्ठ अधिवक्ता जीएसटी का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं?

अधिसूचना संख्या 13/2017 केंद्रीय कर (दर) दिनांक 28.06.2017 के अनुसार अगर वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा किसी न्यायाधिकरण, अदालत या प्राधिकरण के समक्ष सहित किसी अन्य अधिवक्ता के माध्यम दी गई सेवाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रदान की जाती हैं, तो वहॉ कर रिवर्स चार्ज बेसिस पर लिया जाएगा।

इसलिए, यदि वरिष्ठ अधिवक्ता, किसी अधिवक्ता या अधिवक्ताओं की फर्म को सेवाएं प्रदान करते है, तो सेवाओं की छूट नहीं दी जाती है।

क्या अधिवक्ताओं को जीएसटी पंजीकरण कराने की आवश्यकता है?

अधिसूचना संख्या 5/2017 – (केंद्रीय कर) के अनुसार, अधिवक्ताओं को जीएसटी पंजीकरण से छूट दी गई है, यदि आपूर्ति रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के अंतर्गत आती है। लेकिन, जहां अधिवक्ता या अधिवक्ता फर्म के पास कोई अन्य कर योग्य आय है और कुल कारोबार 20 लाख रुपये से अधिक है तो जीएसटी पंजीकरण लेना अनिवार्य है।

क्या अधिवक्ता इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठा सकते हैं?

अधिवक्ता इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं उठा सकते हैं क्योंकि आउटपुट आपूर्ति आरसीएम के तहत प्राप्तकर्ता के अंत में कर योग्य है।

टैक्स की दर क्या है

अधिवक्ता सेवाओं पर कर की दर 18 प्रतिशत है।

Service ProviderNature of ServiceService ReceiverTax Liability
Senior AdvocateRepresentational Services
(GST under RCM to be
paid by Business Entity)
Senior AdvocateYes, RCM
Individual AdvocateYes, RCM
Firm of AdvocatesYes, RCM
Non – Business EntityNo
Small Business Entity (Turnover >/=20 Lakhs)No
Business Entity turnover > Rs. 20 LakhsYes, RCM
Senior AdvocateOther than
Representational
Services
Senior Advocate
FCM
Individual AdvocateFCM
Firm of AdvocatesFCM
Non – Business EntityNo
Small Business Entity (Turnover >/=20 Lakhs)No
Business Entity turnover > Rs. 20 LakhsYes, RCM
Firm of advocates
or an individual
advocate
Legal ServicesSenior AdvocateExempt
Individual AdvocateExempt
Firm of AdvocatesExempt
Non – Business EntityExempt
Small Business Entity
(Turnover >/=20 Lakhs)
Yes, RCM
Business Entity turnover >
Rs. 20 Lakhs
Exempt

जेके मित्तल मामला-

जे.के. मित्तल एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया (रिट याचिका संख्या 5709/2017) मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानूनी सेवाएं रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत कर योग्य हैं। लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं के विषय में, सरकार से उचित स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।

जीएसटी के तहत अधिवक्ताओं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के कर दायित्व के संबंध में, दिल्ली उच्च न्यायलय के समक्ष लंबित मामलों को स्थानांतरित करने के लिए भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया। सर्वाेच्च न्यायालय ने अंतरण (सिविल) याचिका सं 26060-2462/2017 में अपने आदेश दिनांक 28.03.2018 के माध्यम से सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मंगा लिया है। यह मामला अभी भी उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है।

हाल में दिए गए निर्णय

हाल ही में उड़ीसा उच्च न्यायालय ने जीएसटी आयोग के सभी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए है कि जीएसटी अधिनियम के तहत किसी भी वकीलों को जीएसटी दायित्व के लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया जाये।

इसी तरह बंबई उच्च न्यायालय ने सहायक आयुक्त केंद्रीय माल और सेवा कर (जीएसटी) द्वारा जारी एक मांग नोटिस पर भी रोक लगा दी है जिसमें कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए एक वकील पर कर (सेवा) लगाया गया था।

निष्कर्ष

उपरोक्त चर्चा से यह सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अधिवक्ता केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के तहत कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। हालाँकि, जहाँ विधिक सेवायें किसी व्यवसायिक इकाई, जिसका रु 20 लाख से अधिक का टर्नओवर है, को प्रदान किया गया है, तो रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत कर देय होगा।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं के संबंध में, समान छूट उपलब्ध है, लेकिन यदि वरिष्ठ अधिवक्ता अधिवक्ता या अधिवक्ता फर्म को सेवाएं प्रदान करते है, तो कर में छूट नहीं दी जाती है। यहां यह भी बताना आवश्यक है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए सरकार से बहुत स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।

रजत राजन सिंह
अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ
एवं
मुख्य संपादक (लॉ ट्रेण्ड)

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