बेल के लिए पत्नी को दीजीए बीस हजार रूपये प्रतिमाह, सुप्रीम कोर्ट ने किया हस्तक्षेप से इनकार

सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है।

पटना उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत पाने की शर्त के रूप में उसकी पत्नी को 20000 रुपये प्रति माह का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

मामले के संक्षिप्त तथ्य –

याचिकाकर्ता की पत्नी ने याचिकाकर्ता के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था। 

गिरफ्तारी के डर से याचिकाकर्ता ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अग्रिम जमानत हेतु आवेदन दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान, माननीय न्यायाधीश को पता चला कि पति-पत्नी के बीच तलाक का मामला भी चल रहा था।

माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को जमानत दे दी।

लेकिन इसमें एक शर्त लगा दी कि उसे अपनी पत्नी को मासिक रूप से 20,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

याचिकाकर्ता ने आदेश को संशोधित करने के लिए आवेदन किया , लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था। 

उच्च न्यायालय के आदेश से क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता ने सर्वाेच्च न्यायालय का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं किया बेल आदेश में परिवर्तन

याचिकाकर्ता के वकील ने दिल्ली के मुनीश भसीन एवं अन्रू बनाम एनसीटी दिल्ली पर भरोसा किया। इस मामले में सर्वाेच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया था, क्यांकि उच्च न्यायालय ने पति को अग्रिम जमानत के लिए एक शर्त के रूप में पत्नी को रखरखाव का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के साथ हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं। 

Case Details:-

Title: MOHAN MURARI VERSUS THE STATE OF BIHAR & ANR

Case No. SLP No. 20961/2020

Date Of Order: 16.10.2020

Coram: Hon’ble Justice NV Ramana, Hon’ble Justice Surya Kant and Hon’ble Justice Krishna Murar

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