बाबरी मस्जिद विध्वंस मामल में निर्णय कल; बार एसोसिएशन ने वकीलों को कोर्ट आने से परहेज करने की दी सलाह

कल बुधवार 30.09.2020 को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। 1992 में देश भर में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद घातक दंगे हुए थे। लगभग 2000 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

इस मुद्दे और सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए, सेंट्रल बार एसोसिएशन ऑफ लखनऊ ने वकीलों को 30 सितंबर को अदालत का दौरा न करने की सलाह दी है, जब तक कि अत्यधिक आवश्यक न हो।

आइए मामले की पूरी समयावधि पर एक नज़र डालें –

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद, अयोध्या में दो प्राथमिकी दर्ज की गईं। पहली प्राथमिकी विभिन्न अनाम कारसेवकों (धार्मिक स्वयंसेवकों) के खिलाफ दर्ज की गई थी।
दूसरी प्राथमिकी में, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं जैसे उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी और लालकृष्ण आडवाणी का नाम लिया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि श्री लालकृष्ण आडवाणी वह व्यक्ति थे जिन्होंने विध्वंस की रचना रची थी।
जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, 45 और एफआईआर दर्ज की गईं।
8 जुलाई 1993 को, रायबरेली में इस मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष सीबीआई अदालत स्थापित की गई थी।
28 जुलाई 2005 को इस मामले में आरोप तय किए गए।
57 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 मई 2017 को मामले को लखनऊ कोर्ट में 28 स्थानांतरित कर दिया।

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में नया मोड़।

जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश से हाई प्रोफाइल आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप हटाए गए, जिसमें श्री लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल हैं, सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 में फैसले को पलट दिया।

2017 के फैसले से पहले रायबरेली और लखनऊ कोर्ट में अलग-अलग न्यायालय मामलों की सुनवाई कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 में सम्पूर्ण मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया।

लखनऊ में स्थिति

सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ ने अपने सदस्य वकीलों से अनुरोध किया है कि वे पुराने हाईकोर्ट बिल्डिंग परिसर का दौरा न करें, यह अनुरोध सुरक्षा के कड़े इंतजामों को देखते हुए किया गया है।

इससे पहले, विशेष न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दिया, जिसमें ट्रायल के समापन का समय दिया गया था, जिसे उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुमति दी गई थी और 30 सितंबर तक निर्णय देने का समय दिया गया था।

फैसला माननीय न्यायमूर्ति सुरेंद्र यादव, विशेष न्यायाधीश सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाया जाएगा।

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